अमेरिका-इज़राइल और ईरान जंग का 14वां दिन, फुटेज में देंखे USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमले का दावा, बोइंग KC 135 इराक में क्रैश
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी जंग आज 14वें दिन में प्रवेश कर गई है। इस बीच, फारस की खाड़ी में हालिया घटनाओं ने वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापार को हिला कर रख दिया है।ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एयरक्राफ्ट कैरियर फारस की खाड़ी में तैनात था और हमले में जहाज को “भारी नुकसान” हुआ है। ईरानी सेना की स्पेशल यूनिट इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि हमले के बाद यह एयरक्राफ्ट कैरियर पीछे हट रहा है और अमेरिका की तरफ लौट रहा है।
हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक इस हमले की पुष्टि नहीं की गई है और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह हमला सच है, तो यह फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक क्षमता और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।इसी बीच, अमेरिका का एक सैन्य विमान बोइंग KC 135 इराक में क्रैश हो गया है। इस घटना के तुरंत बाद, इराक के एक शिया विद्रोही गुट ने दावा किया कि उसने विमान को मार गिराया है। इस घटना ने अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा योजनाओं पर नई चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इराक में अमेरिकी विमान और सैनिकों की सुरक्षा खतरे में है, और यह घटनाएँ फारस की खाड़ी में तनाव को और बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन पर हमले और KC 135 के क्रैश जैसी घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। फारस की खाड़ी के पास होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर यह तनाव तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल सकता है। हर दिन इस मार्ग से लगभग 130 बड़े और छोटे जहाज गुजरते हैं, और किसी भी बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।विदेश नीति विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की यह सख्ती अमेरिकी नौसैनिक शक्ति के सामने उसकी रणनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश हो सकती है। वहीं, अमेरिका की प्रतिक्रिया अब पूरे विश्व की निगाहों में है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो फारस की खाड़ी और मध्यपूर्व में अप्रत्याशित सैन्य घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक वार्ता या शांति प्रस्ताव सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेषकर तेल आयातक देशों की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर फारस की खाड़ी में संघर्ष जारी रहा, तो न केवल वैश्विक तेल बाजार बल्कि घरेलू LPG और ईंधन की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में USS अब्राहम लिंकन और अन्य अमेरिकी जहाजों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। वहीं, KC 135 क्रैश मामले की जांच भी चल रही है। यह देखना बाकी है कि अमेरिका इस घटना का जवाब किस स्तर पर देता है और ईरान के साथ तनाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाता है। इस प्रकार, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष 14वें दिन भी वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

