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लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, वीडियो में देंखे 54 वोट से नहीं मिल सका दो-तिहाई बहुमत

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, वीडियो में देंखे 54 वोट से नहीं मिल सका दो-तिहाई बहुमत

संसद में महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में लंबी और गहन चर्चा के बाद यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और 54 वोटों के अंतर से गिर गया। इस प्रस्तावित बिल में संसद की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान भी शामिल था।सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक पर लोकसभा में करीब 21 घंटे तक विस्तृत बहस चली, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। चर्चा के बाद अंततः मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई। वोटिंग के दौरान कुल 528 सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

मतदान के परिणामों में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष ने एकजुट होकर 230 वोटों में अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि सरकार को स्पष्ट बहुमत मिला, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक विशेष बहुमत हासिल नहीं हो सका।लोकसभा में वर्तमान में कुल 540 सांसद कार्यरत हैं, जिनमें से तीन सीटें खाली हैं। संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से 528 सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत 352 वोट होता है।

सरकार को इस विधेयक के समर्थन में 298 वोट ही प्राप्त हुए, जिससे वह आवश्यक संख्या से 54 वोट पीछे रह गई। इसी कारण यह बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम सरकार के लिए रणनीतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर एक बड़ा झटका है, क्योंकि महिला आरक्षण को लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष ने इस परिणाम को अपनी एकजुटता की जीत बताते हुए कहा कि प्रस्तावित सीट वृद्धि और अन्य प्रावधानों पर पर्याप्त चर्चा और सहमति नहीं बनाई गई।

विधेयक के गिरने के बाद संसद में आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे को भविष्य में फिर से संशोधित रूप में सदन में ला सकती है, लेकिन फिलहाल यह प्रयास असफल रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केवल साधारण बहुमत नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक सहमति की आवश्यकता होती है।

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