रूस के साइबेरिया में भालुओं का आतंक! हमलों में 22 लोगों की मौत, सरकार ने शिकारियों को दी छूट
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में भूरे भालुओं के बढ़ते हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जंगली भालुओं के रिहायशी इलाकों में घुसने और इंसानों पर हमला करने की घटनाओं के बीच प्रशासन ने उनकी आबादी नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रभावित इलाकों में लाइसेंस प्राप्त शिकारियों को भालुओं का शिकार करने की अनुमति दी जा रही है।भालुओं के हमलों से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। कई जगह लोग घरों से बाहर निकलने में भी सावधानी बरत रहे हैं। अधिकारियों के सामने अब लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वन्यजीवों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने की चुनौती है।
भालुओं के हमलों में 22 लोगों की मौत का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, रूसी सरकारी मीडिया ने बताया है कि इस वसंत से अब तक भालुओं के हमलों में कम से कम 22 लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने इससे पहले भी कुछ क्षेत्रों में भूरे भालुओं की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने की बात कही थी।उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन दशकों में रूस में भूरे भालुओं की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़कर लगभग 3.08 लाख तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों का छोटा और अपेक्षाकृत गर्म होना भी भालुओं की आबादी में वृद्धि के संभावित कारणों में शामिल हो सकता है।
आखिर इंसानी बस्तियों में क्यों घुस रहे हैं भालू?
रूसी मीडिया में प्रकाशित विशेषज्ञों की टिप्पणियों के मुताबिक, इस साल बसंत जल्दी आने और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण भालुओं के प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता प्रभावित हुई। खासकर बेरीज जैसे खाद्य पदार्थों की कमी के चलते उन्हें भोजन की तलाश में दूर तक जाना पड़ा।इसके अलावा, खुले में फेंका गया कचरा और खाने का सामान भी भालुओं को रिहायशी इलाकों की ओर आकर्षित कर सकता है। जब जंगली जानवरों को इंसानी बस्तियों के आसपास आसानी से भोजन मिलने लगता है, तो इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव का खतरा बढ़ जाता है।
क्रास्नोयार्स्क में सबसे ज्यादा चिंता
साइबेरिया का क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र भालुओं के हमलों से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में बताया जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार, यहां 27 हजार से ज्यादा भालू रहते हैं।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगातार हो रही घटनाओं के बाद स्थानीय पर्यावरण मंत्रालय की भूमिका की जांच भी शुरू हुई है। अधिकारियों पर भालुओं की आबादी को नियंत्रित करने में नाकाम रहने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि सितंबर में इस क्षेत्र में भालुओं के हमलों से सात लोगों की मौत हुई।हालांकि, इन घटनाओं की विस्तृत परिस्थितियों और जांच के नतीजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
घरों से बाहर निकलने में डर रहे लोग
भालुओं की मौजूदगी ने स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ इलाकों में लोग बच्चों को पार्कों में खेलने भेजने से डर रहे हैं। बुजुर्गों और अन्य निवासियों को भी बाहर निकलते समय सावधानी बरतनी पड़ रही है।स्थानीय लोगों ने भालुओं को सड़कों पर घूमते, पार्कों में आराम करते और घरों के आसपास दिखाई देते हुए देखने की घटनाएं बताई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें घर से बाहर निकलने से पहले भी कई बार सोचना पड़ता है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
भालुओं के हमलों को रोकने के लिए लाइसेंस प्राप्त शिकारियों की मदद लेने का कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा बढ़ाना और भालुओं की आबादी को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।हालांकि, केवल शिकार से समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी नहीं है। खुले में कचरा फेंकने पर रोक, भोजन के सुरक्षित भंडारण, वन्यजीवों की निगरानी और लोगों को जागरूक करने जैसे उपाय भी अहम हो सकते हैं।साइबेरिया में बढ़ते भालू हमले इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। अब यह देखना होगा कि रूसी प्रशासन की नई रणनीति से हमलों में कितनी कमी आती है और स्थानीय लोगों को कब राहत मिलती है।

