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होर्मुज संकट पर बढ़ी तनातनी: फुटेज में देखें ट्रम्प का बड़ा दावा चीन होर्मुज खोलने में मदद को तैयार, ईरान ने जारी किए नए प्रोटोकॉल 

होर्मुज संकट पर बढ़ी तनातनी: फुटेज में देखें ट्रम्प का बड़ा दावा चीन होर्मुज खोलने में मदद को तैयार, ईरान ने जारी किए नए प्रोटोकॉल 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ा दावा किया है। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में मदद की पेशकश की है। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।

ट्रम्प ने इंटरव्यू में कहा कि शी जिनपिंग नहीं चाहते कि अमेरिका और ईरान के बीच हालात और बिगड़ें। उनके अनुसार, चीन चाहता है कि दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता हो जाए ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि चीन इस मुद्दे पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। यदि यहां किसी प्रकार की रुकावट आती है तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव दुनिया भर की बड़ी ताकतों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

इस बीच, ईरान ने भी होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब इस रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों को ईरानी अधिकारियों की निगरानी और मंजूरी से गुजरना होगा। ईरान का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और संभावित खतरों को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि, कई पश्चिमी देशों ने इसे समुद्री व्यापार पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल कारोबार पर असर पड़ सकता है। यदि निगरानी प्रक्रिया लंबी हुई तो जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ सकती है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ जाएगी।

वहीं, ईरान ने ब्रिक्स देशों से भी अमेरिका और इजराइल की निंदा करने की अपील की है। ईरान का आरोप है कि पश्चिमी देश मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। तेहरान ने ब्रिक्स सदस्य देशों से एकजुट होकर अमेरिकी और इजराइली नीतियों का विरोध करने की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन, रूस और अन्य ब्रिक्स देशों की भूमिका आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि ये देश खुलकर ईरान के समर्थन में आते हैं, तो वैश्विक कूटनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

फिलहाल, दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका-ईरान संबंधों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि चीन की संभावित मध्यस्थता से तनाव कम होता है या फिर हालात और ज्यादा गंभीर रूप ले लेते हैं।

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