Samachar Nama
×

अमेरिका-ईरान तनाव फिर गहराया, नए प्रतिबंधों के बाद तेहरान ने दिखाया सख्त रुख

अमेरिका-ईरान तनाव फिर गहराया, नए प्रतिबंधों के बाद तेहरान ने दिखाया सख्त रुख

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका की ओर से तेहरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ईरान ने कहा है कि वह इस दबाव का सामना करने के लिए तैयार है। ईरानी सरकार ने आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि देश एकजुट रहकर मौजूदा संकट से बाहर निकलने की कोशिश करेगा।अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए करीब 60 लोगों, संस्थाओं और जहाजों को नए प्रतिबंधों के दायरे में शामिल किया है। वॉशिंगटन का मकसद ईरान की तेल आय, वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कारोबार तक पहुंच को सीमित करना है।

ईरान ने कहा- मुश्किल हालात से निकलने की तैयारी

ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार और राष्ट्रपति मजबूत इच्छाशक्ति के साथ देश को मौजूदा मुश्किल दौर से बाहर निकालने के लिए काम करेंगे।

उन्होंने माना कि ईरान के सामने आर्थिक चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि रणनीतिक फैसलों और आपसी एकजुटता के जरिए इन समस्याओं का सामना किया जा सकता है।

ईरान की ओर से आया यह बयान अमेरिका द्वारा नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा के कुछ समय बाद सामने आया है।

अर्थव्यवस्था मंत्री ने भी दिखाई सख्त रुख

ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने भी अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान इन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार है।

मंत्री के मुताबिक, अमेरिका ईरान की आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह रोकने में सफल नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सरकार पहले से ही संभावित नए प्रतिबंधों को देखते हुए तैयारी कर रही थी।

ईरानी सरकार का कहना है कि उसके पास अमेरिकी आर्थिक दबाव का सामना करने के लिए वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं।

अमेरिका ने क्यों बढ़ाया प्रतिबंधों का दायरा?

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ नए आर्थिक अभियान की घोषणा की। अमेरिका का कहना है कि इन कदमों के जरिए ईरान की आय के प्रमुख स्रोतों और वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जाएगा।

नए प्रतिबंधों में करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही अमेरिका ने दूसरे देशों और कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने पर उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से जुड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

तेल कारोबार पर भी नजर

ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए तेल निर्यात बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में अमेरिका की ओर से तेल से जुड़े नेटवर्क और उससे होने वाली आय पर दबाव बढ़ाने की कोशिश तेहरान के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

यदि ईरान की तेल बिक्री और भुगतान व्यवस्था पर प्रतिबंधों का असर बढ़ता है, तो देश की विदेशी मुद्रा आय पर दबाव आ सकता है। इसका असर पहले से आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।

महंगाई और कमजोर मुद्रा से पहले ही परेशान ईरान

ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इसके साथ ही देश में महंगाई, मुद्रा की कमजोरी और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।

नए अमेरिकी प्रतिबंध ऐसे समय में आए हैं जब तेहरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक सीमित पहुंच के कारण कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक टकराव बढ़ने से इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है, इसलिए उसके तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय वैकल्पिक आर्थिक रास्तों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान की आय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच को और सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव, तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार पर इसकी नजर बनी रहेगी।

Share this story

Tags