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US मिडटर्म पोल में चौंकाने वाले आंकड़े: रिपब्लिकन राज्यों में डेमोक्रेट्स ने बनाई बढ़त, ट्रम्प की नीतियों पर उठे सवाल

US मिडटर्म पोल में चौंकाने वाले आंकड़े: रिपब्लिकन राज्यों में डेमोक्रेट्स ने बनाई बढ़त, ट्रम्प की नीतियों पर उठे सवाल

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने अपनी संसदीय बढ़त बचाने की चुनौती है। दूसरी तरफ, कई चुनावी सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि कुछ ऐसे राज्यों में भी मुकाबला कड़ा हो गया है, जिन्हें पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

राष्ट्रीय सर्वे में डेमोक्रेट्स को बढ़त

अल जजीरा की 1 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, RealClearPolling के राष्ट्रीय औसत में डेमोक्रेट्स को 51.5 प्रतिशत और रिपब्लिकन को 43.1 प्रतिशत समर्थन मिल रहा था। वहीं, एमर्सन कॉलेज के अक्टूबर के अंतिम सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 52 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 42 प्रतिशत समर्थन मिला।रॉयटर्स-इप्सोस के 26 अक्टूबर को पूरे हुए सर्वे में भी डेमोक्रेट्स को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़त दिखाई गई। पंजीकृत मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 47 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 36 प्रतिशत समर्थन मिला।

कंसास जैसे रिपब्लिकन गढ़ में भी कड़ा मुकाबला

इन चुनावों में कंसास का मुकाबला भी चर्चा में है। वॉशिंगटन पोस्ट-शार स्कूल के सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन को रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल के मुकाबले 52 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि मार्शल को 43 प्रतिशत समर्थन मिला।हालांकि, एमर्सन कॉलेज के दूसरे सर्वे में यह अंतर काफी कम नजर आया। उसमें हैमिल्टन को 50 प्रतिशत और मार्शल को 47 प्रतिशत समर्थन मिला। इससे साफ है कि अलग-अलग सर्वे में मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती है। 

ट्रंप की नीतियां क्यों बन रही हैं चुनावी मुद्दा?

चुनाव से पहले महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की कीमतें, ईंधन और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च मतदाताओं के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। इसके अलावा ईरान के साथ युद्ध और ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों को लेकर भी बहस हो रही है।एमर्सन कॉलेज के सर्वे में 34 प्रतिशत मतदाताओं ने जीवन-यापन की बढ़ती लागत को अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बताया, जबकि 28 प्रतिशत ने सरकारी भ्रष्टाचार से लड़ने को प्राथमिकता दी। 

ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग पर भी नजर

रॉयटर्स-इप्सोस के 26 अक्टूबर को जारी सर्वे के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत थी। वहीं, एमर्सन कॉलेज के सर्वे में संभावित मतदाताओं के बीच उनकी अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत और डिसअप्रूवल रेटिंग 57 प्रतिशत दर्ज की गई।ये आंकड़े बताते हैं कि चुनाव से पहले राष्ट्रपति के कामकाज को लेकर मतदाताओं की राय बंटी हुई है।

क्या डेमोक्रेट्स हासिल कर पाएंगे कांग्रेस में बढ़त?

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला होना है। डेमोक्रेट्स के सामने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल करने की चुनौती है।हालांकि, राष्ट्रीय सर्वे में बढ़त मिलने का मतलब यह नहीं है कि किसी पार्टी की जीत तय हो गई है। खासकर सीनेट की सीटों पर राज्यवार मुकाबले, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और मतदान में लोगों की भागीदारी अहम भूमिका निभाएगी।3 नवंबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही स्पष्ट होगा कि अमेरिकी मतदाताओं ने ट्रंप प्रशासन के दो साल के कामकाज पर क्या फैसला दिया है।

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