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शशि थरूर का बड़ा बयान: दक्षिण एशियाई देशों में Gen Z के विरोध प्रदर्शन और भारत की स्थिति पर दिया विश्लेषण

शशि थरूर का बड़ा बयान: दक्षिण एशियाई देशों में Gen Z के विरोध प्रदर्शन और भारत की स्थिति पर दिया विश्लेषण

नेपाल में आयोजित अन्वीक्षा इवेंट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत-नेपाल संबंधों और नेपाल के चीन के साथ रिश्तों को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत को नेपाल और चीन के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उनके मुताबिक नेपाल को चीन, चीनी पर्यटकों और वहां के कारोबार के साथ संबंध रखने का पूरा अधिकार है। भारत को नेपाल के साथ ऐसा व्यवहार करना चाहिए, जिसमें उसके सम्मान और संप्रभुता का ध्यान रखा जाए।

शशि थरूर ने ‘दिल और सरहदों को जोड़ना: नेपाल और भारत के लोगों के बीच संबंध’ विषय पर आयोजित सेशन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और भारत में हुए Gen-Z आंदोलनों के बीच अंतर पर भी विस्तार से बात की।

दक्षिण एशिया में युवाओं के गुस्से और उम्मीद को समझना जरूरी

शशि थरूर ने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों में दक्षिण एशिया के कई देशों में युवाओं के बीच असंतोष और बदलाव की इच्छा देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि युवाओं में बेहतर भविष्य की उम्मीद, अपनी बात खुलकर रखने की इच्छा और मौजूदा व्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखाई दी।

उन्होंने बताया कि म्यांमार के बाद पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और भारत में भी युवाओं के आंदोलन देखने को मिले। हालांकि, इन सभी आंदोलनों का राजनीतिक असर एक जैसा नहीं रहा। इसका बड़ा कारण यह था कि अलग-अलग देशों की सरकारों ने इन विरोध प्रदर्शनों को अलग-अलग तरीके से संभाला।

नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में क्या रहा अंतर?

थरूर के मुताबिक श्रीलंका और बांग्लादेश में हालात इस हद तक बिगड़े कि वहां सत्ता परिवर्तन हुआ और शीर्ष नेतृत्व को देश छोड़ना पड़ा। नेपाल में भी आंदोलन के बाद सरकार बदली, लेकिन वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रही।

उन्होंने कहा कि नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन हुआ और आगे चुनाव की प्रक्रिया भी जारी रही। उनके अनुसार यही बात नेपाल को श्रीलंका और बांग्लादेश से अलग करती है।

भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम की भी की तारीफ

भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए शशि थरूर ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता दिखाई। उन्होंने दावा किया कि भारत में सिस्टम ने लोगों की भावनाओं और बदलती वास्तविकता को पहचाना।

थरूर ने कहा कि जिस पार्टी को आमतौर पर इस्तीफे की मांग के आगे आसानी से झुकने के लिए नहीं जाना जाता, उसके एक मंत्री ने भी इस्तीफा दिया। उनके मुताबिक यह भारतीय लोकतंत्र की उस क्षमता को दिखाता है, जिसमें व्यवस्था जनता की बदलती अपेक्षाओं के अनुसार खुद को सुधार सकती है।

नेपाल-चीन रिश्तों पर क्या बोले थरूर?

नेपाल के चीन के साथ संबंधों पर बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि भारत को इस मुद्दे पर अत्यधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि नेपाल एक संप्रभु देश है और उसे चीन के साथ व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने का अधिकार है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को नेपाल को वह सम्मान देना चाहिए, जिसका वह हकदार है। उनके अनुसार पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध केवल राजनीतिक समीकरणों से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव से भी बनते हैं।

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