6 शहर, 5 घंटे और लगातार धमाके... ईरान-अमेरिका संघर्ष ने बढ़ाई चिंता, तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव गंभीर स्तर पर पहुँच गया है। मंगलवार (14 जुलाई) को अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के छह से ज़्यादा ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिका की यह कार्रवाई लगभग पाँच घंटे तक चली। ईरान ने कड़ा जवाब देते हुए अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। गौरतलब है कि इस टकराव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हुई है और कीमतें लगभग 2 प्रतिशत बढ़ गई हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि 13 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ पाँच घंटे का ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान अमेरिकी सेना ने बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास समेत कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद ईरान के डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ मिसाइल और ड्रोन सुविधाओं को नष्ट करना था। उसने यह भी बताया कि अभी मध्य पूर्व में 50,000 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
**ईरान का कड़ा जवाब**
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन में अल-जुफैर बेस पर हथियारों के डिपो, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और अमेरिकी सैनिकों के रहने वाली एक इमारत को निशाना बनाया। IRGC ने अमेरिका के MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया।
**टकराव के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी**
इस बढ़ते सैन्य टकराव का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट में साफ दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग $85 प्रति बैरल तक पहुँच गईं, जबकि WTI क्रूड लगभग $80 प्रति बैरल तक पहुँच गया। तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गईं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
**अमेरिका-ईरान टकराव से जुड़ी 10 अहम बातें**
अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए पाँच घंटे का ऑपरेशन चलाया।
अमेरिका ने बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास को निशाना बनाया। अमेरिका ने डिफेंस सिस्टम, मिसाइलों, ड्रोन और नौसैनिक संपत्तियों को भी निशाना बनाया।
मध्य पूर्व में 50,000 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिकों को हाई अलर्ट पर तैनात किया गया है।
IRGC ने बहरीन में अल-जुफैर बेस पर जवाबी हमले की जिम्मेदारी ली।
ईरान ने दो सुपर ऑयल टैंकरों पर हमले की जिम्मेदारी भी ली
UAE ने आरोप लगाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उसके दो ऑयल टैंकरों पर हमला किया गया। संयुक्त राष्ट्र में, ईरान ने अमेरिका पर समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
युद्ध के बढ़ते डर के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आया।
अमेरिका-ईरान युद्ध की आशंका ने ईंधन की आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े संकट को और गहरा कर दिया।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता हुआ था, लेकिन बाद में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों पर हमला कर दिया; इसके जवाब में अमेरिका ने भी कार्रवाई की, जिससे युद्ध की आग फिर से भड़क उठी।

