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Saudi Oil Crisis: सऊदी अरब के तेल सप्लाई रूट पर बढ़ा संकट, होर्मुज के बाद ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी बंद; दुनिया पर क्या होगा असर?
 

Saudi Oil Crisis: सऊदी अरब के तेल सप्लाई रूट पर बढ़ा संकट, होर्मुज के बाद ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी बंद; दुनिया पर क्या होगा असर?

सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में उसके तेल को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने वाले प्रमुख रास्तों में रुकावट आने से वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच Strait of Hormuz में शिपिंग प्रभावित होने के बाद अब सऊदी अरब की महत्वपूर्ण East-West Pipeline भी बंद होने की खबर है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लाल सागर में भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाज पहले से ही जोखिम का सामना कर रहे हैं।


सऊदी अरब के सामने क्यों बढ़ी मुश्किल?
सऊदी अरब का अधिकांश कच्चा तेल देश के पूर्वी हिस्से में उत्पादित होता है। सामान्य परिस्थितियों में इसे फारस की खाड़ी के बंदरगाहों से टैंकरों के जरिए दुनिया के बाजारों तक भेजा जाता है। इस सप्लाई रूट के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम है।
लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण यहां शिपिंग पर दबाव बढ़ने के बाद सऊदी अरब ने अपनी East-West Pipeline, जिसे Petroline भी कहा जाता है, का इस्तेमाल बढ़ाया था।
करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर के किनारे स्थित यानबू तक पहुंचाती है। यहां से तेल को टैंकरों के जरिए आगे भेजा जा सकता है।
पहले ही कम हो गई थी पाइपलाइन से सप्लाई
रिपोर्टों के मुताबिक, संघर्ष से पहले इस पाइपलाइन के जरिए रोजाना करीब 4 से 5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की आवाजाही होती थी। अगस्त में यह मात्रा घटकर लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई थी।
अब पाइपलाइन के संचालन में भी रुकावट आने से सऊदी अरब के लिए अपने तेल निर्यात को सुचारू बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


क्या सऊदी अरब के पास कोई दूसरा रास्ता है?
सऊदी अरब के पास लाल सागर के रास्ते तेल को आगे भेजने का विकल्प मौजूद है। कच्चे तेल को मिस्र तक पहुंचाकर Suez Canal या SUMED Pipeline के जरिए भूमध्य सागर की ओर ले जाया जा सकता है।
हालांकि, यह रास्ता विशेष रूप से एशियाई खरीदारों के लिए आसान विकल्प नहीं है। भारत, चीन और जापान जैसे बड़े तेल आयातकों के लिए लंबा और महंगा समुद्री रूट लागत बढ़ा सकता है।
Cape of Good Hope का बढ़ रहा इस्तेमाल
लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते में सुरक्षा संबंधी परेशानी होने पर कई जहाज अफ्रीका के दक्षिणी छोर से होकर Cape of Good Hope के रास्ते जाने को मजबूर हो रहे हैं।
इस वैकल्पिक रूट से समुद्री यात्रा में करीब 14 से 22 दिन तक अतिरिक्त समय लग सकता है। लंबी दूरी का मतलब जहाजों के ईंधन खर्च, बीमा और माल ढुलाई की लागत में बढ़ोतरी भी है।


क्या दुनिया में तेल संकट गहरा सकता है?
सऊदी अरब से जुड़े प्रमुख सप्लाई रूट पर एक साथ दबाव बढ़ना वैश्विक तेल बाजार के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया में तुरंत कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाएगी।
लेकिन अगर होर्मुज, लाल सागर और सऊदी अरब के वैकल्पिक पाइपलाइन रूट लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं, तो तेल की उपलब्धता, शिपिंग लागत और क्रूड ऑयल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, एविएशन फ्यूल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में तेल बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि इन प्रमुख समुद्री और पाइपलाइन रूट पर हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं।
 

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