नेपाल में जलप्रलय की सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाई तबाही, वीडियो में देंखे गांव-बाजार से लेकर सड़कें और पुल तक बह गए; 1500 लोग लापता
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में आई इस भीषण बाढ़ की तबाही अब सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ दिखाई दे रही है। तस्वीरों में बाढ़ के बाद गांवों और बाजारों के बड़े हिस्से उजड़े हुए नजर आ रहे हैं। सड़कें और पुल मलबे में दब गए हैं, जबकि कई इलाकों में सिर्फ मटमैला पानी और पहाड़ी मलबा दिखाई दे रहा है।
छह घंटे के सैलाब ने बदल दिया पूरा इलाका
सबसे ज्यादा नुकसान नेपाल के रसुवा जिले में हुआ है। तिब्बत सीमा से लगे इस इलाके में त्रिशूली और भोटेकोशी नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव ने नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। कई जगह मकान, वाहन और दूसरी संपत्तियां पानी के तेज बहाव में बह गईं। नेपाल-चीन को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों और पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद का अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जिन इलाकों में पहले सड़कें, घर और दूसरी संरचनाएं नजर आती थीं, वहां अब मलबे की मोटी परत और पानी फैला हुआ दिखाई दे रहा है। इस तबाही ने सीमा क्षेत्र के भौगोलिक स्वरूप को भी काफी हद तक बदल दिया है।
210 मौतें, 1500 लोग अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या 210 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाल में 207 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत बताई गई है। वहीं करीब 1500 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक नेपाल में 826 लोगों के लापता होने की जानकारी है। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं।लापता लोगों में बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री भी हैं। खासतौर पर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े कई लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण नेपाल-तिब्बत के बीच आने-जाने वाला प्रमुख मार्ग बाधित हो गया है। मितेरी पुल के बह जाने और सड़कों को नुकसान पहुंचने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है।
ग्लेशियर टूटने और मलबे से आई तबाही
शुरुआत में सीमा क्षेत्र में महसूस हुए तेज झटकों को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद की जांच में बाढ़ के पीछे ग्लेशियर या पहाड़ी हिस्से के टूटने और भारी मलबे के नदी में आने की बात सामने आई। इससे नदी का प्रवाह अचानक बाधित हुआ और फिर बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर तेजी से बहा। ISRO के सैटेलाइट विश्लेषण ने भी ग्लेशियर के हिस्से के टूटने और नदी में मलबे के बहाव की जानकारी सामने रखी है।
भारतीयों की तलाश जारी
बाढ़ के बाद नेपाल में फंसे और लापता भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार भी लगातार संपर्क में है। राहत और बचाव अभियान में नेपाल की सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां जुटी हुई हैं। प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी चिकित्सा सहायता पहुंचाने का काम किया जा रहा है। भारत ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं।हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सड़क और संचार व्यवस्था को हुए भारी नुकसान के कारण कई दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में आने वाले दिनों में राहत अभियान के आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

