S Jaishankar: जब दुनिया पाकिस्तान के साथ थी, रूस ने भारत का दिया साथ, जयशंकर ने गिनाए 4 बड़े मौके
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और रूस के पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित नहीं हैं। दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कई मौके रहे हैं, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत मुश्किल स्थिति में था और रूस ने उसका समर्थन किया।
जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस संबंध कई दशकों से मजबूत रहे हैं और इनकी नींव लंबे ऐतिहासिक अनुभव पर टिकी है। उन्होंने कश्मीर सहित कई अहम मुद्दों पर सोवियत संघ और रूस के भारत के समर्थन का उल्लेख किया।
कश्मीर मुद्दे पर सोवियत संघ ने लगाया था वीटो
जयशंकर के मुताबिक, भारत के लिए रूस के समर्थन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण कश्मीर से जुड़ा मामला है।
20 फरवरी 1957 को ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर को लेकर एक प्रस्ताव पेश किया था। इसमें क्षेत्र में अस्थायी संयुक्त राष्ट्र बल तैनात करने के विचार पर चर्चा की गई थी।
प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के नौ सदस्यों का समर्थन मिला, लेकिन तत्कालीन सोवियत संघ ने वीटो का इस्तेमाल कर दिया। इसके कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
1965 की जंग में पाकिस्तान के साथ थे कई देश
भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 में युद्ध के दौरान पाकिस्तान को कई देशों का समर्थन मिला था। चीन ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए भारत पर दबाव बनाने के लिए अपनी सीमा के पास सैनिकों की तैनाती की थी।
ईरान और तुर्किये भी उस समय पाकिस्तान के साथ खड़े थे। ईरान की ओर से पाकिस्तान को हथियार और ईंधन उपलब्ध कराए जाने की बात भी सामने आई थी।
1971 में अमेरिका और चीन ने किया पाकिस्तान का समर्थन
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भी पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला। अमेरिका पाकिस्तान के पक्ष में था और उसने अपना युद्धपोत बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा था।
चीन ने भी पाकिस्तान का समर्थन किया। वहीं ईरान ने पाकिस्तान के लिए हथियार जुटाने और सैन्य सामान उपलब्ध कराने में मदद की थी।
इन घटनाओं के संदर्भ में भारत-रूस संबंधों को देखते हुए जयशंकर ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच विश्वास केवल वर्तमान कूटनीतिक जरूरतों से नहीं बना है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख दोहराया
जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए युद्ध खत्म करने की वकालत करता रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर यह बात कह चुके हैं। 2022 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि मौजूदा दौर युद्ध का नहीं है।
जयशंकर ने बताया कि भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत की है। इस दौरान ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, अनाज और ऊर्जा के निर्यात तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने जैसे मुद्दे उठाए गए।
एक हफ्ते में दूसरी बार अमेरिका पर टिप्पणी
जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वह पिछले एक सप्ताह में दूसरी बार अमेरिका से जुड़े भारत के मुद्दों पर बात कर चुके हैं।
29 सितंबर को न्यूयॉर्क के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में उन्होंने कहा था कि भारत की प्रमुख चिंताओं में पाकिस्तान से होने वाला आतंकवाद भी शामिल है। उनके मुताबिक, अगर अमेरिका भारत की इस चिंता को नहीं समझता है, तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है।
जयशंकर के ताजा बयान को भारत की विदेश नीति में पुराने रणनीतिक रिश्तों और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच संतुलन की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

