Russia-US Deal: ट्रंप-पुतिन की डील के बाद अमेरिका की ओर रवाना हुआ रूसी डीजल टैंकर, 7 नवंबर तक पहुंचने का अनुमान
रूस और अमेरिका के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए समझौते के बाद रूसी ईंधन से भरा एक टैंकर न्यूयॉर्क की ओर बढ़ रहा है। शिपिंग डेटा के मुताबिक, माल्टा के झंडे वाला टैंकर 'Agioi Fanendes' रूस के बाल्टिक सागर स्थित प्रिमोर्स्क बंदरगाह से करीब 40 हजार मीट्रिक टन अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल लेकर रवाना हुआ है। इसमें लगभग 3 लाख बैरल ईंधन होने का अनुमान है। जहाज के 7 नवंबर 2026 के आसपास अमेरिका पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि, जहाज के अंतिम गंतव्य और खरीदार की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ट्रंप-पुतिन की बातचीत के बाद बदली अमेरिकी नीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की घोषणा की थी। ट्रंप के मुताबिक, रूस शुरुआती तौर पर 3 लाख टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराने के साथ नवंबर और उसके बाद भी अतिरिक्त आपूर्ति करेगा।
इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल के कारोबार पर लागू कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी 23 अक्टूबर को बताया कि रूस से डीजल ले जाने वाला पहला टैंकर खरीदारों की ओर रवाना हो चुका है। हालांकि, उन्होंने जहाज का नाम और खरीदार की पहचान स्पष्ट नहीं की थी।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी ईंधन पर लगे थे प्रतिबंध
रूस के फरवरी 2022 में यूक्रेन पर व्यापक सैन्य हमला शुरू करने के बाद अमेरिका ने रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिए थे। यूरोपीय संघ ने भी फरवरी 2023 में रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के समुद्री आयात पर प्रतिबंध लागू किया था। इसके बाद रूस के डीजल निर्यात का बड़ा हिस्सा तुर्की, ब्राजील और कुछ अफ्रीकी देशों की ओर जाने लगा।
अगर मौजूदा टैंकर अमेरिका में डीजल उतारता है, तो यह 2022 के बाद रूस से अमेरिका को होने वाली पहली ऐसी आपूर्ति में शामिल होगा। शिपिंग कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, इस टैंकर में लदा ईंधन प्रिमोर्स्क से न्यूयॉर्क जाने वाली पहली रूसी डीजल खेप हो सकती है।
अमेरिका में ईंधन की कीमतें कम करना है मकसद
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को अमेरिका में बढ़ती डीजल कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। डीजल की कीमतों का असर ट्रक परिवहन, कृषि और अन्य क्षेत्रों की लागत पर पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त आपूर्ति से घरेलू बाजार को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि रूसी डीजल की सीमित खेप से अमेरिकी बाजार की कीमतों में कितनी कमी आएगी। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, रूस से आने वाला ईंधन वैश्विक आपूर्ति में बड़े इजाफे के बजाय दूसरे देशों को होने वाली आपूर्ति की दिशा बदल सकता है।
यूक्रेन और अमेरिकी सांसदों ने उठाए सवाल
रूस से ईंधन खरीदने की योजना की यूक्रेन और अमेरिका के कुछ सांसदों ने आलोचना की है। आलोचकों का तर्क है कि रूसी ऊर्जा कारोबार पर प्रतिबंधों में ढील से मॉस्को को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में कर सकता है।
अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों के कुछ सांसदों ने भी इस नीति पर आपत्ति जताई है। वहीं, ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने से कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, Agioi Fanendes की यात्रा पर नजर बनी हुई है। जहाज के अमेरिका पहुंचने, ईंधन उतारने और खरीदार की पहचान स्पष्ट होने के बाद ही इस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति पूरी तरह सामने आएगी।

