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रूस ने तेल-गैस पर दी ‘गारंटी’, भारत ने अमेरिका के सामने रखी वॉशिंगटन से वीज़ा/छूट बढ़ाने की मांग

रूस ने तेल-गैस पर दी ‘गारंटी’, भारत ने अमेरिका के सामने रखी वॉशिंगटन से वीज़ा/छूट बढ़ाने की मांग

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत की कूटनीतिक और ऊर्जा रणनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। रूस की ओर से तेल और गैस सप्लाई को लेकर “भरोसेमंद आपूर्ति” की गारंटी मिलने के बाद भारत ने अमेरिका के सामने एक महत्वपूर्ण मांग रखी है—मौजूदा प्रतिबंधों से जुड़ी छूट (waiver) को आगे बढ़ाने की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति में उतार-चढ़ाव ने ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।

रूस का दावा: भारत को लगातार ऊर्जा सप्लाई की गारंटी

सूत्रों के अनुसार, रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखेगा। रूस का यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में सप्लाई चेन पर दबाव है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका जताई जा रही है। भारत पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। 2022 के बाद से रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद भारत की ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा रही है।

भारत की अमेरिका से मांग: छूट बढ़ाई जाए

इसी बीच भारत ने अमेरिका से यह आग्रह किया है कि रूसी तेल आयात से जुड़ी मौजूदा छूट (waiver) की अवधि बढ़ाई जाए। यह छूट भारत को कुछ प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल के सीमित आयात की अनुमति देती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मांग ऐसे समय की गई है जब मौजूदा छूट की समय सीमा बेहद करीब है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर है।

क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर ईरान से जुड़ा संघर्ष, वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित कर रहा है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी 80% से अधिक तेल जरूरतें आयात से पूरी करता है, इसलिए सप्लाई में किसी भी बाधा का सीधा असर अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।

ऊर्जा संतुलन की कूटनीति

भारत की मौजूदा रणनीति यह दिखाती है कि वह किसी एक देश पर निर्भर हुए बिना ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण (diversification) चाहता है। एक तरफ रूस से सस्ता तेल, दूसरी तरफ अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन—यह नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनती जा रही है। विशेषज्ञ इसे “मल्टी-अलाइनमेंट एनर्जी पॉलिसी” के रूप में देख रहे हैं, जिसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है।

अमेरिका की भूमिका पर नजर

अब सभी की नजर इस बात पर है कि अमेरिका भारत की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है। पहले भी अमेरिका ने वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए कुछ देशों को सीमित छूट दी थी।

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