रूस का अमेरिका पर आरोप, भारत पर हमसे तेल नहीं खरीदने का दबाव, वीडियो में देखें बोले - अमेरिका एनर्जी सप्लाई पर कंट्रोल चाहता है
रूस ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 9 फरवरी को डिप्लोमैटिक वर्कर्स डे के अवसर पर कहा कि अमेरिका दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर कब्ज़ा करना चाहता है और इसके लिए वह भारत जैसे देशों पर दबाव डाल रहा है ताकि वे रूस से सस्ता तेल न खरीदें। लावरोव का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि देश मजबूर होकर महंगी अमेरिकी गैस खरीदें, जिससे अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को फायदा हो।
लावरोव ने अमेरिकी नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि रूस की विदेशों में रखी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई हैं और रूस के खिलाफ लगातार प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि ये कदम वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं और देशों को अपनी नीतियों में अमेरिका के दबाव के अधीन कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की बात करता है, लेकिन जो प्रतिबंध पहले लगाए गए थे, वे अब भी जारी हैं। रूस का कहना है कि यूक्रेन पर सहमति बनने के बाद भी अमेरिका ने नए प्रतिबंध लगाए और पहले लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने में कोई पहल नहीं की। लावरोव ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के खिलाफ बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान उस समय आया है जब रूस पर पश्चिमी देशों की नीतियों और आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस ऐसे दबावों के बावजूद अपने ऊर्जा साझेदार देशों के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत, चीन और अन्य देशों के साथ रूस की ऊर्जा साझेदारी अमेरिका की नीतियों से प्रभावित नहीं होगी।
लावरोव ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को नियंत्रित करने की अमेरिकी कोशिशें केवल अपने फायदे के लिए हैं। उनका कहना था कि दुनिया को विकल्प तलाशने का पूरा हक है और कोई भी देश महंगी अमेरिकी गैस पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ निष्पक्ष संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बीच, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि लावरोव के बयान से अमेरिका और रूस के बीच तनाव फिर से बढ़ सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका पर आरोप लगाना रूस की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
रूस के विदेश मंत्री ने अंत में यह भी कहा कि रूस अमेरिका की धमकियों और आर्थिक दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के प्रति सजग रहेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि रूस के लिए ऊर्जा सहयोग और व्यापारिक साझेदारियां प्राथमिकता हैं, और वह किसी भी दबाव में अपने निर्णय नहीं बदलेगा।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस और अमेरिका के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।

