बुढ़ापे को मात देने की तैयारी, पुतिन सरकार का 2.47 लाख करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट, फुटेज में जाने इंसानी अंग उगाने पर होगा काम
रूस ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक मिशन शुरू किया है। राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की पहल पर शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट की लागत 26 अरब डॉलर (करीब 2.47 लाख करोड़ रुपये) बताई जा रही है। इस मिशन के तहत जीन थेरेपी, लैब में मानव अंग विकसित करने और क्रायोथेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध किया जाएगा।
26 अरब डॉलर का एंटी-एजिंग मिशन
रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने "न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज" नामक कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना, गंभीर बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करना और लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ जीवन प्रदान करना है।
मिनी पिग्स में उगाए जाएंगे इंसानी अंग
इस परियोजना का सबसे चर्चित हिस्सा मिनी पिग्स के शरीर में मानव अंग विकसित करने की तकनीक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक के जरिए अंग प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक अंगों की कमी को दूर किया जा सकता है। इससे हजारों मरीजों को नया जीवन मिलने की संभावना है।
जीन थेरेपी और लैब में तैयार होंगे अंग
प्रोजेक्ट के तहत जीन थेरेपी पर भी व्यापक शोध किया जाएगा। वैज्ञानिक ऐसे उपचार विकसित करने की कोशिश करेंगे जो उम्र बढ़ने से जुड़ी कोशिकीय क्षति को कम कर सकें। इसके अलावा प्रयोगशालाओं में कृत्रिम मानव अंग तैयार करने की तकनीक को भी विकसित किया जाएगा।
क्रायोथेरेपी पर भी रहेगा फोकस
इस मिशन में बेहद कम तापमान वाली क्रायोथेरेपी तकनीक को भी शामिल किया गया है। माना जाता है कि यह तकनीक शरीर की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने और कुछ बीमारियों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि इस क्षेत्र में अभी और शोध की आवश्यकता है।
1.75 लाख लोगों की जान बचाने का लक्ष्य
रूसी सरकार का दावा है कि इस कार्यक्रम के जरिए दशक के अंत तक करीब 1 लाख 75 हजार लोगों की जान बचाई जा सकेगी। साथ ही उम्र संबंधी बीमारियों को कम कर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
दुनिया भर की नजरें इस प्रोजेक्ट पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है तो यह चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। हालांकि मानव अंगों के विकास, जीन संपादन और एंटी-एजिंग तकनीकों को लेकर नैतिक और वैज्ञानिक बहस भी जारी है।

