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होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नई फीस की तैयारी, वीडियो में जाने ईरान-ओमान के बीच अहम बातचीत तेज

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नई फीस की तैयारी, वीडियो में जाने ईरान-ओमान के बीच अहम बातचीत तेज

मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। ईरान और ओमान इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर फीस वसूली के नए सिस्टम को लेकर बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की नई बनाई गई “पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” ने होर्मुज स्ट्रेट के लिए एक विशेष “मैनेजमेंट सुपरविजन एरिया” तय कर दिया है, जहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए अब परमिट लेना अनिवार्य किया जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अथॉरिटी का कहना है कि इस समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, निगरानी और ट्रैफिक कंट्रोल को मजबूत करने के लिए नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके तहत जहाजों को पहले अनुमति लेनी होगी और इसके बदले उनसे निर्धारित शुल्क भी वसूला जा सकता है। माना जा रहा है कि ईरान इस कदम के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से बड़ा राजस्व हासिल करना चाहता है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक तेल और गैस पहुंचाने में इस जलमार्ग की अहम भूमिका है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या प्रतिबंध सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है।

फरवरी में अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल ट्रैफिक को लगभग रोक दिया था। इस फैसले का असर पूरी दुनिया की शिपिंग इंडस्ट्री पर देखने को मिला। कई जहाजों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़े, जबकि तेल की कीमतों में भी अचानक तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईरान इस संकट को आर्थिक अवसर में बदलने की कोशिश कर रहा है। परमिट और फीस सिस्टम लागू होने से ईरान को अरबों डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कई पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समुद्री मार्ग पर अत्यधिक नियंत्रण या अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो वैश्विक व्यापार महंगा हो सकता है और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

ओमान इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा रहा है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट का एक हिस्सा उसकी समुद्री सीमा से भी जुड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत का उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिससे सुरक्षा और व्यापार दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बातचीत पर टिकी हुई है। यदि ईरान और ओमान के बीच कोई समझौता होता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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