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PoK Violence: रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, 7 की मौत और 18 गंभीर घायल; बच्चों की भी गई जान

PoK Violence: रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, 7 की मौत और 18 गंभीर घायल; बच्चों की भी गई जान

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। गुरुवार को रावलकोट में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की ओर से गोलीबारी किए जाने का आरोप लगा है। इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों में बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाया। पार्टी के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान भारी मशीनगनों, ड्रोन और बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, घटना पर पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

तीन स्थानों पर कार्रवाई का आरोप

UKPNP के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने रावलकोट के मटियालमेरा बस टर्मिनल, उमर फारूक चौक और अन्य स्थानों पर चल रहे धरनों को निशाना बनाया। पार्टी का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के साथ ड्रोन से भी हमले किए गए। इस कार्रवाई में कई लोग हताहत हुए।

आंदोलन में अब तक 153 लोगों की मौत का दावा

PoK में 7 जून से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है। गुरुवार की घटना में 7 लोगों की मौत के बाद आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों की कुल संख्या 153 बताई जा रही है। शुरुआत में यह आंदोलन स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक परेशानियों को लेकर शुरू हुआ था। अब प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी सुरक्षाबलों को वापस बुलाने और अपने नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं।

आखिर क्यों हो रहा है PoK में विरोध प्रदर्शन?

इस आंदोलन के पीछे चार प्रमुख मुद्दे बताए जा रहे हैं।

1. विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों पर विवाद

PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 12 सीटें पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीर मूल के लोगों के लिए आरक्षित हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान की सरकार स्थानीय राजनीति में हस्तक्षेप करती है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र के वास्तविक निवासियों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है।

7 जून को PoK सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह विवाद और गहरा गया। अदालत ने कहा था कि संवैधानिक बदलाव किए बिना इन आरक्षित सीटों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

2. मंगला डैम से बनने वाली बिजली का मुद्दा

PoK के मंगला डैम से बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन होता है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें बिजली महंगी दरों पर मिलती है। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि डैम से उत्पादित बिजली स्थानीय उपभोक्ताओं को कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाए।

3. महंगाई और आटे की बढ़ती कीमतें

क्षेत्र में महंगाई और जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की परेशानी बढ़ाई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि बिजली के साथ-साथ आटे पर भी सब्सिडी दी जाए, ताकि आम परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके।

4. सुरक्षाबलों की वापसी और नेताओं पर दर्ज केस खत्म करने की मांग

प्रदर्शनकारी आंदोलन के दौरान तैनात पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बन गई है।

रावलकोट में हुई ताजा हिंसा ने PoK में जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोपों के बीच अब सबकी नजर पाकिस्तानी प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति पर है।

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