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PM मोदी ने किया ‘गुड महाराजा’ का जिक्र, जिन्होंने 1,000 पोलिश बच्चों को दी थी शरण; 16 साल बाद भारत आए डोनाल्ड टस्क

PM मोदी ने किया ‘गुड महाराजा’ का जिक्र, जिन्होंने 1,000 पोलिश बच्चों को दी थी शरण; 16 साल बाद भारत आए डोनाल्ड टस्क

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। गुरुवार, 22 अक्टूबर को उन्होंने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।मुलाकात के दौरान भारत और पोलैंड के ऐतिहासिक रिश्तों की भी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गुड महाराजा’ का जिक्र किया। यह उपाधि जामनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा को दी गई थी। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के करीब 1,000 बच्चों को भारत में शरण दी थी। उनके रहने, खाने, पढ़ाई और इलाज की व्यवस्था भी कराई गई थी।

भारत बना था हजारों पोलिश बच्चों का दूसरा घर

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत ने पोलैंड के हजारों नागरिकों को शरण देकर उनकी मदद की थी। इस इतिहास से जुड़ी प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1939: जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद पोलैंड पर कब्जा हो गया। बड़ी संख्या में पोलिश नागरिक बेघर हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।

  • 1942: नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने जामनगर के पास बालाचड़ी में करीब 1,000 पोलिश बच्चों को शरण दी। उनके लिए रहने, खाने, शिक्षा और इलाज की व्यवस्था की गई।

  • भाषा और संस्कृति का सम्मान: बच्चों को अपनी भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर दिया गया। इसी मानवीय मदद के कारण पोलैंड में महाराजा को ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ कहा जाने लगा।

  • कोल्हापुर में भी मिली शरण: 1943 में कोल्हापुर रियासत के वलीवडे शिविर में करीब 5,000 पोलिश शरणार्थियों को जगह मिली। यहां स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं।

  • 1945 के बाद वापसी: दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद पोलिश नागरिक अपने देश लौटने लगे। 1948 तक ज्यादातर शरणार्थी वापस जा चुके थे।

महाराजा दिग्विजयसिंहजी के योगदान को पोलैंड में आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। उन्हें मरणोपरांत पोलैंड के ‘कमांडर्स क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मेरिट’ सम्मान से नवाजा गया। वर्ष 1989 में पोलैंड की राजधानी वारसॉ में उनके सम्मान में ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ बनाया गया।

अगस्त 2024 में पोलैंड दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चौक पर श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने उन पोलिश परिवारों के वंशजों से भी मुलाकात की थी, जिन्हें दूसरे विश्व युद्ध के समय भारत में शरण मिली थी।

16 साल बाद भारत आए पोलैंड के प्रधानमंत्री

डोनाल्ड टस्क करीब 16 साल बाद भारत के दौरे पर आए हैं। इससे पहले वे 2010 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत आए थे।इस बार उनके साथ करीब 100 पोलिश कंपनियों का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया है। पोलैंड का लक्ष्य 2030 तक भारत के साथ सालाना व्यापार को दोगुना करना है।नई दिल्ली में कार्यक्रम पूरे करने के बाद टस्क 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे। वहां वे सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और अन्य तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों और कारोबारियों से मुलाकात करेंगे।

भारत-पोलैंड के बीच 4 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर जोर

1. रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन की तैयारी

भारत और पोलैंड रक्षा उपकरणों के डिजाइन, विकास और उत्पादन में साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहे हैं। दोनों देश मिलकर हथियार और अन्य रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं। इसके लिए आपसी भरोसा बढ़ाने और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा से जुड़े समझौतों की जरूरत होगी।

2. 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

पोलैंड 2030 तक भारत के साथ सालाना व्यापार दोगुना करना चाहता है। इसी उद्देश्य से करीब 100 कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। ये कंपनियां भारतीय बाजार में नए कारोबारी अवसरों और साझेदारियों की तलाश करेंगी।भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता भी दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

3. अंतरिक्ष और तकनीक में साझेदारी

भारत और पोलैंड के बीच अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक और बैटरी रिसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। पोलैंड की खाद्य प्रसंस्करण, खनन और मशीनरी के क्षेत्र में भी विशेषज्ञता है।टस्क नई दिल्ली में भारत-पोलैंड व्यापार मंच में शामिल होंगे। इसके बाद बेंगलुरु में वे तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।

4. यूक्रेन में शांति के मुद्दे पर सहयोग

पोलैंड भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है। दोनों देश यूक्रेन में शांति की कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत कर सकते हैं।भारत और पोलैंड के मौजूदा संबंधों के साथ-साथ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मिली मानवीय मदद की विरासत भी दोनों देशों की दोस्ती को एक ऐतिहासिक आधार देती है। ‘गुड महाराजा’ की कहानी इसी साझा इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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