फ्रांस में महंगाई के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरेंगे लोग, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; फुटेज में देंखे 2,700 से ज्यादा गिरफ्तारियां
फ्रांस में पिछले सप्ताह हुई हिंसा और लूटपाट के बाद अब एक बार फिर महंगाई के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन होने जा रहे हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। देशभर में करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इनके साथ पुलिस की विशेष टीमें, लगभग 20 बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले 15 वाहन भी तैनात रहेंगे। प्रशासन की कोशिश है कि इस बार प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट जैसी घटनाओं को रोका जा सके।पिछले शनिवार को फ्रांस में पांच लाख से ज्यादा लोग प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उरे थे। प्रदर्शन के दौरान कई जगह हालात बिगड़ गए। दुकानों में तोड़फोड़ की गई, लूटपाट की घटनाएं हुईं और कई गाड़ियों में आग लगा दी गई। हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 2,700 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। मौजूदा हालात को देखते हुए कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है और लोगों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
हिंसा रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था सख्त
प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए फ्रांस सरकार ने बड़े स्तर पर सुरक्षा बल तैनात किए हैं। करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मी प्रमुख शहरों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी करेंगे। पुलिस की विशेष टीमें भीड़ को नियंत्रित करने और हिंसा की आशंका वाले क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगी।इसके अलावा, बख्तरबंद वाहनों और पानी की बौछार करने वाले वाहनों को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है। प्रशासन उन इलाकों पर विशेष नजर रख रहा है, जहां पिछले प्रदर्शन के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई थीं।कई शहरों में कर्फ्यू और भीड़ जुटाने पर रोक के कारण प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं।
लूव्र म्यूजियम बंद, फुटबॉल मैच भी टला
प्रदर्शन और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का असर फ्रांस की सामान्य गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। पेरिस स्थित प्रसिद्ध लूव्र म्यूजियम बंद रहेगा। वहीं, पेरिस सेंट-जर्मेन और लियोन के बीच होने वाला फुटबॉल मैच भी टाल दिया गया है।सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक स्थलों और बड़े आयोजनों को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। आशंका है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ने से यातायात, कारोबार और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
स्कूलों की खराब हालत से शुरू हुआ आंदोलन
फ्रांस में शुरू हुआ यह आंदोलन अब कई मुद्दों को लेकर व्यापक रूप ले चुका है। शुरुआत में स्कूलों की खराब हालत को लेकर लोगों ने विरोध जताया था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें महंगाई, बढ़ते खर्च और सरकारी सुविधाओं में कटौती जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए।प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का प्रमुख कारण रोजमर्रा की जिंदगी पर बढ़ते आर्थिक दबाव को माना जा रहा है। महंगाई के कारण घरेलू बजट पर पड़ने वाले असर और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष ने आंदोलन को और व्यापक बनाया है।अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं पर नियंत्रण रखना है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की आर्थिक और सामाजिक चिंताओं का समाधान भी तलाशना है।
सरकार के सामने कानून-व्यवस्था और महंगाई की चुनौती
पिछले सप्ताह की हिंसा के बाद फ्रांस में सुरक्षा व्यवस्था सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। हजारों गिरफ्तारियों और कई शहरों में प्रतिबंधों के बावजूद प्रशासन को आशंका है कि नए प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ सकता है।हालांकि, इस बार बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से हिंसा रोकने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन का असर कितना व्यापक होगा और सरकार महंगाई तथा सरकारी सुविधाओं में कटौती को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कदम उठाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

