पैराग्वे में राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पद से हटाए गए, वीडियो में जाने घर में किया गया नजरबंद; बैंक डूबने से भड़का था जनता का गुस्सा
पैराग्वे में राजनीतिक और आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को शुक्रवार को पद से हटा दिया गया। सीनेट के सभी 44 सदस्यों ने उन्हें पद से हटाने के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद पेना को उनके घर में ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया है। उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। यह पूरा मामला देश के बड़े बैंक यूएनो के बंद होने के बाद सामने आया है, जिससे करीब 30 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
राष्ट्रपति पद से हटाए जाने के बाद पेना को आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार विरोधी जांच एजेंसी के सामने पेश होना होगा। जांच पूरी होने तक उन्हें घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। इस मामले में पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो की गिरफ्तारी के आदेश भी जारी किए गए हैं। कार्वालो को पेना ने ही इस पद पर नियुक्त किया था।
सरकारी धन यूएनो बैंक में जमा कराने का आरोप
सांसदों का आरोप है कि पेना ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सरकारी धन के करोड़ों डॉलर यूएनो बैंक में जमा करवाए। इस रकम में सरकारी पेंशन फंड के 35.5 करोड़ डॉलर भी शामिल थे। आरोप है कि बैंक में जमा कराई गई यह राशि निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक थी।सांसदों के मुताबिक, सरकारी धन को एक निजी बैंक में जमा कराने के फैसले में नियमों की अनदेखी की गई। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाएंगी कि इस प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी और सरकारी धन जमा कराने के पीछे क्या वजह थी।
बैंक बंद होने से 30 लाख लोग प्रभावित
दरअसल, तीन दिन पहले पैराग्वे की नियामक एजेंसियों ने यूएनो बैंक को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद बैंक के ग्राहकों के खाते और कार्ड काम करना बंद हो गए। हालात ऐसे हो गए कि लोग अपने ही बैंक खातों से पैसे नहीं निकाल पा रहे थे।बैंक के अचानक बंद होने से देशभर में आर्थिक अस्थिरता की स्थिति बन गई। करीब 30 लाख ग्राहकों के प्रभावित होने की खबर के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने राष्ट्रपति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख पर भी कार्रवाई
इस पूरे मामले में पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उनकी गिरफ्तारी के आदेश जारी किए गए हैं। पेना ने उन्हें केंद्रीय बैंक प्रमुख नियुक्त किया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यूएनो बैंक में सरकारी धन जमा कराने के फैसले में उनकी क्या भूमिका रही।फिलहाल पेना को घर में नजरबंद रखा गया है और उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश होना है। यूएनो बैंक के बंद होने से शुरू हुआ यह विवाद अब पैराग्वे के बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है। सीनेट की कार्रवाई और जांच के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

