ड्रोन हमलों से बचने के लिए पाकिस्तान का अनोखा जुगाड़, पुलिस चौकियों के ऊपर लगाए मछली पकड़ने वाले जाल
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बढ़ते ड्रोन हमलों के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने एक कम लागत वाला तरीका अपनाया है। यहां कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए जा रहे हैं। सुरक्षाकर्मियों को उम्मीद है कि हमलावर ड्रोन इन जालों में फंस सकते हैं और इस तरह चौकी पर सीधे होने वाले हमले का असर कम किया जा सकता है।अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बल इस तरह के जाल का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल भी उठाए हैं और कहा है कि विस्फोटकों से लैस ड्रोन के खिलाफ यह तरीका कितना कारगर होगा, यह ड्रोन के डिजाइन और जाल की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
आतंकियों ने बदला हमले का तरीका
पाकिस्तानी पुलिस के मुताबिक, आतंकवादी अब पारंपरिक गोलीबारी और मोर्टार हमलों के अलावा ड्रोन का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। इसी वजह से सुरक्षा चौकियों को ऊपर से होने वाले हमलों से बचाने के लिए नए उपाय किए जा रहे हैं।खैबर पख्तूनख्वा का हंगू जिला इन हमलों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, 29 जुलाई को यहां एक पुलिस चौकी को विस्फोटकों से लदे ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया था। इस हमले में 11 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। इसके बाद कई घंटे तक चली मुठभेड़ में 15 हमलावरों के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई थी।पुलिस के अनुसार, इस साल हंगू जिले में कम से कम 16 हमले हो चुके हैं। लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए पुलिस ने चौकियों की सुरक्षा व्यवस्था में यह नया प्रयोग शुरू किया है।
चौकी के ऊपर बनाई जा रही जाल की छत
हंगू में अपनाए गए इस तरीके के तहत पुलिस चौकी की छत और चारदीवारी के बीच कई मीटर ऊपर मजबूत जाल लगाया जा रहा है। इससे चौकी के ऊपर एक तरह की जालीदार छत तैयार हो जाती है।सुरक्षाकर्मियों का अनुमान है कि यदि कोई ड्रोन सीधे चौकी के ऊपर पहुंचता है तो वह इस जाल में उलझ सकता है। इससे ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने में बाधा पैदा हो सकती है और हमले के संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।हालांकि, पुलिस की ओर से नुकसान में 40 से 50 फीसदी तक कमी आने का दावा किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने की बात कही है।
एक चेकपोस्ट को ढकने में करीब 1.4 लाख रुपये का खर्च
हंगू के जिला पुलिस अधिकारी तारिक हबीब के अनुसार, एक सामान्य पुलिस चेकपोस्ट को इस तरह के जाल से ढकने में करीब 1.4 लाख पाकिस्तानी रुपये का खर्च आता है।पुलिस के मुताबिक, हंगू के अलावा कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे अन्य संवेदनशील जिलों में भी पुलिस चौकियों और चेकपोस्ट के आसपास इस तरह के जाल लगाए जा रहे हैं।कुछ इलाकों में सेना के ठिकानों पर भी इन्हें 'एंटी-ड्रोन नेट' के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया गया है कि इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने प्रांतीय सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग भी की है।
विशेषज्ञ बोले- हर ड्रोन को जाल से रोकना आसान नहीं
इस व्यवस्था को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है। इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के कार्यकारी निदेशक इम्तियाज गुल ने इस तरीके को लेकर सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि आतंकियों के निशाने सिर्फ पुलिस चौकियां या चेकपोस्ट नहीं होते। ड्रोन का इस्तेमाल ऐसे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए भी किया जा सकता है, जहां हमले का प्रभाव ज्यादा हो।उनके मुताबिक, असली चुनौती यह है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी ड्रोन को हवा में उड़ान भरने के तुरंत बाद पहचानकर उसे रोकने में कितनी सक्षम हैं।
यूक्रेन में भी हुआ है जाल का इस्तेमाल
पेशावर के सुरक्षा और आतंकवाद विशेषज्ञ फिदा अदील के मुताबिक, ड्रोन से बचाव के लिए जाल का इस्तेमाल कोई बिल्कुल नया तरीका नहीं है। दुनिया के अलग-अलग संघर्ष क्षेत्रों में सैन्य प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण सामान को ड्रोन से बचाने तथा छिपाने के लिए जाल जैसी संरचनाओं का इस्तेमाल किया गया है।यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन से बचाव के लिए इसी तरह के नेटवर्क और जाल का इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट सामने आती रही हैं।हालांकि, विशेषज्ञ के मुताबिक विस्फोटकों से भरे ड्रोन के खिलाफ मछली पकड़ने वाला जाल कितना प्रभावी होगा, यह कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ड्रोन की गति, वजन, आकार, विस्फोटक क्षमता, जाल की मजबूती और उसे कितनी ऊंचाई पर लगाया गया है—इन सभी चीजों का असर पड़ सकता है।
40-50 फीसदी नुकसान कम होने के दावे पर सवाल
पाकिस्तानी पुलिस की ओर से दावा किया गया है कि जाल के इस्तेमाल से ड्रोन हमले में होने वाले नुकसान को 40 से 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना वास्तविक हमलों या नियंत्रित परीक्षणों के इस प्रतिशत की पुष्टि करना मुश्किल है।यानी फिलहाल यह तरीका एक कम लागत वाली सुरक्षा व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसे ड्रोन हमलों का पूर्ण समाधान नहीं माना जा सकता।
पाकिस्तान के सामने बढ़ रहा ड्रोन का खतरा
खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से आतंकवादी हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों से जूझता रहा है। अब ड्रोन के इस्तेमाल ने सुरक्षा बलों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।कम लागत में सुरक्षा बढ़ाने के लिए जाल लगाने का प्रयोग इसी बदलते खतरे का जवाब माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक ड्रोन के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा के लिए सिर्फ जाल पर निर्भर रहने के बजाय ड्रोन की पहचान, निगरानी और उसे निष्क्रिय करने वाली अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जरूरत पड़ सकती है।फिलहाल पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों के ऊपर दिखाई देने वाले ये जाल चर्चा का विषय बने हुए हैं—जहां हाईटेक ड्रोन खतरे के सामने सुरक्षा बलों ने बेहद साधारण दिखने वाले मछली पकड़ने के जाल को एक संभावित सुरक्षा कवच के तौर पर आजमाना शुरू किया है।

