Samachar Nama
×

UN में आतंकी हाफिज सईद पर घिरे पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ: पत्रकारों के 'आतंकवाद पर पनाह' वाले तीखे सवालों से बचकर भागे

UN में आतंकी हाफिज सईद पर घिरे पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ: पत्रकारों के 'आतंकवाद पर पनाह' वाले तीखे सवालों से बचकर भागे

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे, लेकिन यहां उनका सामना ऐसे सवालों से हुआ, जिनका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। UN परिसर में प्रवेश करते समय पत्रकारों ने शहबाज शरीफ से आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर सवाल किए।पत्रकारों ने शहबाज से पूछा कि पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेगा। हालांकि, शहबाज शरीफ ने इस सवाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए।जब प्रधानमंत्री UN मुख्यालय से बाहर निकल रहे थे, तब पत्रकारों ने एक बार फिर उनसे सवाल किया कि पाकिस्तान हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई कब करेगा। इस बार भी शहबाज ने सवाल का जवाब नहीं दिया और वहां से आगे निकल गए।

26/11 मुंबई हमले से जुड़ा है हाफिज सईद का नाम

हाफिज सईद का नाम 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले से जुड़ा रहा है। भारत ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा रहा है।

इसके अलावा अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की ओर से दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में भी हाफिज सईद को आरोपी बनाया गया है। NIA ने कथित साजिश में उसे आरोपी नंबर 8 बताया है और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया है।

UN में पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी दावे

दिलचस्प बात यह है कि शहबाज शरीफ इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का जिक्र कर चुके हैं।

2025 में UNGA में अपने भाषण के दौरान शहबाज ने दावा किया था कि पाकिस्तान दो दशकों से ज्यादा समय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान आतंकवादियों से नहीं लड़ता, तो वे न्यूयॉर्क और लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते।

शहबाज ने उस दौरान आतंकवाद के कारण पाकिस्तान में 90 हजार से ज्यादा लोगों की मौत और करीब 150 अरब डॉलर के आर्थिक नुकसान का भी दावा किया था।

1987 में बना था लश्कर-ए-तैयबा

लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1987 में पाकिस्तान में हुआ था। इसकी जड़ें सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से जुड़ी बताई जाती हैं।

संगठन के शुरुआती दौर में इसके लड़ाकों को अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाने की बात सामने आती है। बाद में 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर की ओर हो गया।

इसी दौर के बाद हाफिज सईद संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल हुआ। भारत, अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों की ओर से लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के बीच कथित संबंधों के आरोप लगाए जाते रहे हैं। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

UNHRC में भी भारत-पाकिस्तान आमने-सामने

संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है। 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद यानी UNHRC में पाकिस्तान ने भारत में कश्मीर और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।

इसके जवाब में भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान द्वारा हथियार और प्रशिक्षण दिए गए आतंकियों ने 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किया।

भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि कश्मीर में अलग-अलग समुदायों के लोगों को आतंकियों ने निशाना बनाया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम भी शामिल थे।

भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का मुद्दा भी उठाया

भारत ने UNHRC में पाकिस्तान के भीतर अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों से जुड़े मुद्दों के अलावा जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह, ईशनिंदा कानून तथा शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों के खिलाफ कथित भेदभाव का जिक्र किया।

भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान से उसके कब्जे वाले हिस्से को खाली करने की मांग भी दोहराई।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच UN मुख्यालय में हाफिज सईद को लेकर शहबाज शरीफ से पूछे गए सवाल और उनका जवाब दिए बिना आगे बढ़ जाना चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई का दावा करता रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवाद से जुड़े संगठनों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाता रहा है।

Share this story

Tags