Pakistan Political Crisis: खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन का ऐलान, इमरान खान की PTI सरकार पर संकट
पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव बढ़ने की खबर है। दिए गए विवरण के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया है। इस कदम से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की प्रांतीय सरकार पर संकट गहरा गया है।
प्रांत में PTI की सरकार है। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे थे। केंद्र सरकार का आरोप है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा है। हालांकि, इन आरोपों और सरकार बर्खास्त किए जाने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
PTI ने फैसले को बताया अलोकतांत्रिक
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की गई। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी तथा गवर्नर शासन लागू करने का फैसला लिया गया।
PTI ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांत के अधिकारों को कमजोर करने से शांति और स्थिरता स्थापित नहीं की जा सकती।
इमरान खान के करीबी सहयोगी और पार्टी प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने भी फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि इस तरह के कदम से राजनीतिक तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है। PTI ने बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया है।
इमरजेंसी और गवर्नर शासन का क्या मतलब है?
पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत युद्ध, बाहरी आक्रमण या गंभीर आंतरिक संकट जैसी परिस्थितियों में इमरजेंसी घोषित की जा सकती है।
वहीं, अनुच्छेद 234 प्रांतीय संवैधानिक व्यवस्था के विफल होने की स्थिति में गवर्नर शासन से संबंधित है। इसके तहत केंद्र सरकार को प्रांत के प्रशासन में अधिक भूमिका मिल सकती है। हालांकि, ऐसी व्यवस्था लागू करने और जारी रखने के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं तथा संसदीय मंजूरी से जुड़ी शर्तों का पालन करना जरूरी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में अनुच्छेद 233 का इस्तेमाल नहीं किया गया। यह अनुच्छेद इमरजेंसी के दौरान कुछ मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित है।
इमरान खान की रिहाई को लेकर मार्च
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई कानूनी मामले चल रहे हैं। PTI लगातार उनकी रिहाई की मांग करती रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में समर्थकों का मार्च केंद्र सरकार के साथ बातचीत के दो दौर विफल होने के बाद शुरू हुआ। विवाद की एक प्रमुख वजह इमरान खान से मुलाकात की मांग बताई गई है। PTI चाहती थी कि प्रदर्शन खत्म करने से पहले पार्टी नेताओं को उनसे मिलने दिया जाए, जबकि सरकार पहले प्रदर्शन समाप्त करने पर जोर दे रही थी।
इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी
प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने की चेतावनी के बाद इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के रास्तों पर कंटेनर लगाकर कुछ सड़कों को बंद किया गया।
पाकिस्तान में PTI और केंद्र सरकार के बीच पहले भी कई बार टकराव हो चुका है। ऐसे में खैबर-पख्तूनख्वा को लेकर लिया गया कोई भी बड़ा प्रशासनिक फैसला देश की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर असर डाल सकता है।

