New Zealand Election 2026: न्यूजीलैंड चुनाव में लक्सन की नेशनल पार्टी आगे, लेबर पार्टी से कांटे की टक्कर, किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के आसार
न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए मतदान खत्म होने के बाद शुरुआती नतीजों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की सत्ताधारी नेशनल पार्टी शुरुआती वोटों की गिनती में बढ़त बनाए हुए है, जबकि विपक्षी लेबर पार्टी भी ज्यादा पीछे नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती नतीजों में नेशनल पार्टी को 31.19 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि लेबर पार्टी 28.35 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर है।
हालांकि, शुरुआती आंकड़ों से अभी यह साफ नहीं हुआ है कि अगली सरकार किसकी बनेगी। न्यूजीलैंड की संसद में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में किसी भी प्रमुख पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में छोटी पार्टियों की भूमिका काफी अहम हो सकती है।
चुनाव आयोग शनिवार रात तक करीब 95 प्रतिशत मतदान केंद्रों के शुरुआती नतीजे जारी करेगा। विदेश में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के मतों की गिनती पूरी होने के बाद 27 नवंबर को अंतिम परिणाम आने की उम्मीद है।
कौन हैं प्रधानमंत्री पद के दो प्रमुख दावेदार?
1. क्रिस्टोफर लक्सन: दूसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश
न्यूजीलैंड के मौजूदा प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन एक बार फिर अपनी सरकार बनाने के लिए चुनावी मैदान में हैं। उन्होंने 2023 के आम चुनाव में सेंटर-राइट नेशनल पार्टी को जीत दिलाई थी। इस जीत के साथ ही देश में छह साल से चल रही लेबर पार्टी की सरकार का अंत हो गया था।
हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद से लक्सन को अपनी ही पार्टी के भीतर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस साल अप्रैल और अगस्त में पार्टी के कुछ सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए और उन्हें पद से हटाने की कोशिश की। दोनों बार लक्सन अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे।
इसके अलावा उनकी सरकार को धीमी आर्थिक सुधार प्रक्रिया और गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के बीच मतभेदों को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी है।
2. क्रिस हिपकिंस: लेबर पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने की चुनौती
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में प्रमुख दावेदार हैं। उनका लक्ष्य लेबर पार्टी को दोबारा सत्ता में पहुंचाना है। 2023 के चुनाव में पार्टी को बड़ी हार मिली थी, जिसके बाद वह सत्ता से बाहर हो गई थी।
क्रिस हिपकिंस पहली बार 2008 में सांसद बने थे। जनवरी 2023 में जैसिंडा अर्डर्न के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने देश की कमान संभाली थी। हालांकि, उनका प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल करीब नौ महीने ही चला।
इस बार लेबर पार्टी महंगाई से राहत देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी स्वास्थ्य एवं अन्य सेवाओं को बेहतर बनाने के वादे के साथ चुनाव लड़ रही है।
न्यूजीलैंड चुनाव में ये 3 मुद्दे रहे सबसे अहम
1. महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था
इस चुनाव में अर्थव्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और लोगों की आर्थिक परेशानियों ने राजनीतिक दलों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है।
नेशनल पार्टी सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखने और बजट को फिर से फायदे की स्थिति में लाने पर जोर दे रही है। वहीं, लेबर पार्टी का फोकस घरेलू खर्च कम करने, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। पार्टी मकान, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं में निवेश बढ़ाने का भी वादा कर रही है।
2. बिजली, किराना और टैक्स का मुद्दा
बिजली और रोजमर्रा के सामान की बढ़ती कीमतों ने भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटी राजनीतिक पार्टियां इन समस्याओं के समाधान के लिए बड़े बदलावों का प्रस्ताव लेकर आई हैं।
न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी बिजली कंपनियों और बड़ी सुपरमार्केट कंपनियों के ढांचे में बदलाव करना चाहती है। वहीं, ग्रीन पार्टी सरकारी बिजली कंपनी और सरकारी सुपरमार्केट चेन बनाने का प्रस्ताव दे रही है।
ग्रीन पार्टी अमीर लोगों, बड़ी कंपनियों और बैंकों पर अधिक टैक्स लगाने के साथ आम लोगों का इनकम टैक्स कम करने की पक्षधर है। दूसरी ओर, अपॉर्च्युनिटी पार्टी जमीन की कीमत के आधार पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव लेकर आई है।
3. इमिग्रेशन और वोटिंग के नियम
विदेशियों के रहने के नियम और मतदान का अधिकार भी इस बार चुनावी बहस का हिस्सा रहे। ACT पार्टी गंभीर अपराध करने वाले लोगों को न्यूजीलैंड से वापस भेजने के पक्ष में है।
वहीं, न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी चाहती है कि वोट देने का अधिकार केवल देश के नागरिकों तक सीमित हो। फिलहाल निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले स्थायी निवासी भी न्यूजीलैंड में मतदान कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें लगातार कम से कम 12 महीने देश में रहना जरूरी है।
कैसे चुनी जाती है न्यूजीलैंड की सरकार?
न्यूजीलैंड में हर तीन साल में आम चुनाव कराए जाते हैं। यहां मिक्स्ड मेंबर प्रपोर्शनल (MMP) चुनाव प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था के तहत मतदाताओं को दो अलग-अलग वोट देने का अधिकार मिलता है।
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पहला वोट अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए होता है।
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दूसरा वोट अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी के लिए दिया जाता है।
निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाला उम्मीदवार सांसद बनता है। वहीं, देशभर में किसी पार्टी को मिले कुल वोटों के अनुपात के आधार पर उसे संसद में अतिरिक्त सीटें मिलती हैं।
न्यूजीलैंड की संसद में सामान्य तौर पर 120 सीटें होती हैं। सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए।
छोटी पार्टियों के हाथ में हो सकती है सत्ता की चाबी
शुरुआती नतीजों में नेशनल पार्टी और लेबर पार्टी के बीच करीबी मुकाबला दिखाई दे रहा है। ऐसे में अगर दोनों में से कोई भी पार्टी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंचती है, तो छोटी पार्टियों का समर्थन सरकार बनाने के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
इसका मतलब है कि चुनाव में कम वोट पाने वाली पार्टियां भी सरकार के गठन और नीतियों को तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। अब सबकी नजरें अंतिम चुनावी नतीजों पर टिकी हैं, जिनसे न्यूजीलैंड की अगली सरकार की तस्वीर साफ होगी।

