Samachar Nama
×

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने जुटाए हथियार: वीडियो में जाने 5 हजार से ज्यादा एजेंसियों का गुप्त नेटवर्क बनाया, चीन-रूस से मंगाए मिसाइलों के पुर्जे

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने जुटाए हथियार: वीडियो में जाने 5 हजार से ज्यादा एजेंसियों का गुप्त नेटवर्क बनाया, चीन-रूस से मंगाए मिसाइलों के पुर्जे

अमेरिका और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने सैन्य सामान की खरीद जारी रखी। रॉयटर्स की एक विशेष जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने 5 हजार से ज्यादा रक्षा मंत्रालय से जुड़ी एजेंसियों का गुप्त नेटवर्क तैयार किया। इस नेटवर्क के जरिए चीन, रूस, जर्मनी और अन्य देशों से मिसाइलों के पुर्जे, विस्फोटक, रॉकेट ईंधन बनाने वाले रसायन, विमान के पार्ट्स और भारी ट्रक खरीदे गए।रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच इस नेटवर्क के जरिए कम से कम 2 अरब डॉलर का सैन्य और दोहरे इस्तेमाल वाला सामान आयात किया गया। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1 हजार करोड़ रुपये बैठती है। जांच में एक एजेंसी MOD 346428 के बारे में सामने आया कि उसने इसी अवधि में अकेले करीब 2.3 अरब डॉलर का सैन्य सामान आयात किया।

एक ही पते पर दर्ज थीं हजारों एजेंसियां

रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, इन एजेंसियों के नाम में MOD शब्द का इस्तेमाल किया गया, जो ईरान के रक्षा मंत्रालय को दर्शाता है। इन सभी का पंजीकृत पता तेहरान में रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लॉजिस्टिक्स विभाग के पते से मेल खाता है।दस्तावेजों में इन एजेंसियों की स्थापना की तारीख 11 फरवरी 1979 दर्ज थी, लेकिन जांच में पता चला कि इनमें से ज्यादातर का गठन वर्ष 2013 में हुआ था। उस समय ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव बढ़ रहा था और देश के तेल निर्यात तथा अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा था।रिपोर्ट में इन एजेंसियों को ईरान के रक्षा मंत्रालय और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े सैन्य खरीद नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है। कुछ एजेंसियों के संबंध ईरान के बड़े कारोबारी और अर्ध-सरकारी समूहों से भी पाए गए।

विदेशी कंपनियों और बिचौलियों का लिया सहारा

इस नेटवर्क के जरिए सैन्य सामान खरीदने के लिए विदेशों में बनी कंपनियों और बिचौलियों का इस्तेमाल किया जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान तेल की बिक्री से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल इन खरीदों के लिए करता था। विदेशों में मौजूद भरोसेमंद बिचौलिए अपने बैंक खातों में उपलब्ध रकम से सामान खरीदते और फिर उसे ईरान भेजते थे।रॉयटर्स ने जिन शिपमेंट का अध्ययन किया, उनमें करीब 97 प्रतिशत लेनदेन बिना सीमा पार मुद्रा हस्तांतरण के निपटाए गए। यानी खरीद के लिए हर बार सीधे ईरान से दूसरे देश में पैसा भेजने की जरूरत नहीं पड़ती थी। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी और प्रतिबंधों से बचने में मदद मिल सकती थी।

मिसाइल और ड्रोन बनाने में काम आने वाला सामान खरीदा

जांच में सामने आया कि नेटवर्क के जरिए रॉकेट ईंधन बनाने वाले रसायन, विस्फोटक, डेटोनेटर, टाइटेनियम, विमान के इंजन के पुर्जे और औद्योगिक मशीनें मंगाई गईं। इसके अलावा सैकड़ों भारी ट्रक भी खरीदे गए, जिन्हें जरूरत पड़ने पर मिसाइल या ड्रोन लॉन्च करने वाले वाहनों में बदला जा सकता है।आयात रिकॉर्ड में चीन, रूस और जर्मनी सहित कई देशों से सामान आने का जिक्र है। कुछ खेपें जमीन, समुद्र और हवाई रास्तों से ईरान पहुंचीं। रिपोर्ट में बताया गया कि इस नेटवर्क के कुछ लाभार्थियों में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी सैन्य इकाइयां भी शामिल हैं।

2016 से इस्तेमाल हो रहा था यह तरीका

रॉयटर्स की जांच में पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़ी कुछ एजेंसियों की गतिविधियों के निशान वर्ष 2016 से ही शिपिंग और आयात दस्तावेजों में मिलते हैं। यानी प्रतिबंधों के बावजूद सैन्य सामान खरीदने का यह तरीका नया नहीं है, बल्कि कई वर्षों से इस्तेमाल किया जा रहा था।इस जांच के लिए ईरान के बैंकिंग रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज, कंपनियों के पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड और करीब 19 हजार आयात दस्तावेजों का अध्ययन किया गया। रॉयटर्स ने अमेरिकी-इजराइली जोखिम सलाहकार कंपनी 240 Analytics के साथ मिलकर इस नेटवर्क की पड़ताल की।इस रिपोर्ट से पता चलता है कि ईरान ने प्रतिबंधों के बीच सैन्य खरीद के लिए एक जटिल अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तैयार कर रखी थी। हालांकि, रिपोर्ट में जिन एजेंसि का जिक्र है, उनमें से सभी को अलग-अलग पश्चिमी प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने का प्रमाण नहीं मिला।

Share this story

Tags