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मिडिल ईस्ट तनाव का असर, भारतीय एयरलाइंस पर बढ़ा दबाव, वीडियो में देंखे ऑपरेटिंग कॉस्ट 20% तक बढ़ी

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारतीय एयरलाइंस पर बढ़ा दबाव, वीडियो में देंखे ऑपरेटिंग कॉस्ट 20% तक बढ़ी

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय विमानन सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने चेतावनी दी है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उनकी परिचालन लागत लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है।FIA ने इस गंभीर स्थिति को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी है, जिसमें बताया गया है कि मौजूदा हालात में घरेलू एयरलाइंस के लिए अपना कामकाज सामान्य रूप से जारी रखना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। संगठन के अनुसार, ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो गए हैं कि कई एयरलाइंस अपनी उड़ान सेवाओं को सीमित करने या कुछ विमानों को ग्राउंड करने पर विचार कर सकती हैं। यानी आने वाले समय में यात्रियों को फ्लाइट उपलब्धता और किराए दोनों में असर देखने को मिल सकता है।FIA ने सरकार से राहत की मांग करते हुए कहा है कि एविएशन सेक्टर को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। संगठन ने सुझाव दिया है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और वैट में कटौती की जाए, जिससे एयरलाइंस पर बढ़ते खर्च का बोझ कुछ हद तक कम हो सके और उद्योग को स्थिरता मिल सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन ईंधन एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी सीधे टिकट दरों और ऑपरेशनल लागत को प्रभावित करती है। मौजूदा वैश्विक तनाव ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है।एविएशन सेक्टर पहले ही कोविड-19 के बाद आर्थिक दबाव से उबरने की कोशिश कर रहा था, और अब नए भू-राजनीतिक संकट ने इसकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। घरेलू यात्रा मांग में सुधार के बावजूद बढ़ती लागत एयरलाइंस के लिए मुनाफे को बनाए रखना मुश्किल बना रही है।

FIA की रिपोर्ट के बाद अब सबकी नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि समय पर राहत उपाय नहीं किए गए, तो इसका असर न केवल एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा, बल्कि यात्रियों को भी महंगे टिकट और कम उड़ानों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, विमानन उद्योग एक नाजुक दौर से गुजर रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय संकट और घरेलू नीतिगत फैसले मिलकर इसकी दिशा तय करेंगे।

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