मेडिकल साइंस का बड़ा खुलासा: 150 सालों में बदल गई इंसानी शरीर की बनावट, जानें क्यों घट रहा है हमारा सामान्य तापमान
करीब 150 साल पहले इंसानों के शरीर का औसत तापमान आज के मुकाबले ज्यादा हुआ करता था। उस समय 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फारेनहाइट को सामान्य शरीर के तापमान का मानक माना गया था। लेकिन अब कई वैज्ञानिक शोधों में सामने आया है कि स्वस्थ वयस्कों के शरीर का औसत तापमान घटकर करीब 36.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है।
यह बदलाव वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय बना हुआ है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि पिछले डेढ़ सौ सालों में इंसानों के शरीर का तापमान कम हो गया? क्या पुराने समय में तापमान मापने के तरीके में कोई गलती थी या फिर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, साफ-सफाई और बदलती जीवनशैली ने शरीर के तापमान को प्रभावित किया है?BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें पुराने समय में इस्तेमाल किए जाने वाले थर्मामीटर की सीमाएं और आधुनिक दौर में लोगों के स्वास्थ्य में आया सुधार, दोनों शामिल हैं।
37 डिग्री सेल्सियस को सामान्य तापमान किसने माना था?
शरीर के सामान्य तापमान के लिए 37 डिग्री सेल्सियस का पैमाना 19वीं सदी में लोकप्रिय हुआ था। 1860 के दशक में जर्मनी के डॉक्टर कार्ल वंडरलिच ने बुखार और शरीर के तापमान पर विस्तृत अध्ययन किया।
उन्होंने करीब 15 साल तक लगभग 25 हजार मरीजों के शरीर का तापमान मापा। इस दौरान उन्होंने 10 लाख से ज्यादा तापमान रीडिंग जुटाईं। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने स्वस्थ वयस्कों के शरीर का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फारेनहाइट बताया।
उनके अध्ययन में 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान को बुखार का संकेत माना गया। उस समय इतने बड़े स्तर पर तापमान से जुड़ा डेटा उपलब्ध होना बड़ी बात थी। यही वजह रही कि 37 डिग्री सेल्सियस धीरे-धीरे सामान्य शरीर के तापमान का मानक बन गया।
आज इंसानों के शरीर का औसत तापमान क्यों घट गया?
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की संक्रामक रोग विशेषज्ञ जूली पार्सोनेट और उनकी टीम ने शरीर के तापमान में आए बदलाव को समझने के लिए अमेरिका के करीब 1.90 लाख लोगों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। ये आंकड़े 1862 से 2017 के बीच जुटाए गए थे।
रिसर्च के मुताबिक, आज अमेरिकी वयस्कों के शरीर का औसत तापमान करीब 36.39 डिग्री सेल्सियस पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 19वीं सदी की शुरुआत के मुकाबले अमेरिकी पुरुषों के औसत तापमान में करीब 0.59 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है।
यह बदलाव केवल अमेरिका जैसे विकसित देशों तक सीमित नहीं है। दक्षिण अमेरिका के अमेजन क्षेत्र में रहने वाले त्सिमाने समुदाय पर किए गए अध्ययन में भी शरीर के तापमान में गिरावट देखी गई। 2000 के शुरुआती वर्षों में इस समुदाय का औसत तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस था, जो 2018 तक घटकर लगभग 36.5 डिग्री सेल्सियस रह गया।
इस दौरान समुदाय के लोगों के रहन-सहन, स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई की आदतों में भी बदलाव आया।
शरीर का तापमान घटने की 3 बड़ी वजहें
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इंसानों के शरीर का औसत तापमान कम होने के पीछे स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े कई कारण हो सकते हैं।
1. बेहतर स्वास्थ्य और इलाज की सुविधाएं
पुराने समय में टीबी, पेचिश और दांतों व हड्डियों से जुड़े गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां काफी आम थीं। इन बीमारियों से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार सक्रिय रहती थी। इससे शरीर में ऊर्जा खर्च होती थी और गर्मी भी पैदा होती थी।
आज एंटीबायोटिक दवाओं, बेहतर इलाज और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की वजह से कई संक्रमणों का समय पर उपचार संभव हो गया है। इससे शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन और संक्रमण के मामलों में कमी आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका असर शरीर के औसत तापमान पर भी पड़ सकता है।
2. साफ-सफाई और टीकाकरण का बढ़ता दायरा
शरीर का तापमान कम होने के पीछे बेहतर साफ-सफाई और टीकाकरण को भी एक संभावित वजह माना जाता है। पहले कई इलाकों में लोगों को दूषित पानी, गंदगी और परजीवी संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
त्सिमाने समुदाय पर हुए अध्ययन में पाया गया कि अब पहले की तुलना में ज्यादा लोग जूते पहनते हैं और शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। इससे जमीन के संपर्क में आने से फैलने वाले हुकवर्म जैसे परजीवी संक्रमण में कमी आई है।
हुकवर्म एक प्रकार का परजीवी है, जो शरीर में संक्रमण पैदा कर सकता है। ऐसे संक्रमण कम होने से शरीर में लगातार चलने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया भी घट सकती है।
3. घर और दफ्तर के तापमान में बदलाव
आधुनिक जीवनशैली में एयर कंडीशनर और हीटिंग सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ा है। अब लोग घरों, दफ्तरों और अन्य जगहों पर काफी हद तक नियंत्रित तापमान वाले माहौल में रहते हैं।
पहले मौसम की गर्मी और ठंड से शरीर को खुद को बचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती थी। लेकिन अब नियंत्रित वातावरण में शरीर को अपना तापमान बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत कम मेहनत करनी पड़ सकती है। विशेषज्ञ इसे भी शरीर के तापमान में बदलाव की संभावित वजहों में शामिल करते हैं।
क्या 150 साल पहले तापमान मापने में गलती होती थी?
शरीर के तापमान में गिरावट की एक वजह पुराने समय में इस्तेमाल किए जाने वाले थर्मामीटर भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने कार्ल वंडरलिच के समय इस्तेमाल होने वाले कांच के थर्मामीटर की जांच की थी।
कुछ विश्लेषणों के मुताबिक, उस दौर के थर्मामीटर आधुनिक उपकरणों की तुलना में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रीडिंग दे सकते थे। हालांकि, पुराने और नए तापमान मापने के तरीकों में अंतर होने के कारण इन आंकड़ों की सीधी तुलना करना आसान नहीं है।
उस समय पारे वाले थर्मामीटर करीब 30 सेंटीमीटर लंबे होते थे और तापमान मापने में 15 से 20 मिनट तक लग जाते थे। डॉक्टर वंडरलिच आमतौर पर बगल में थर्मामीटर लगाकर तापमान मापते थे, जबकि आज कई जगह मुंह से तापमान मापने का तरीका इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल भी है कि शरीर के तापमान में आई गिरावट का कितना हिस्सा वास्तविक बदलाव है और कितना पुराने मापने के तरीकों का असर हो सकता है।
वैज्ञानिक पुराने आंकड़ों को पूरी तरह गलत क्यों नहीं मानते?
शोधकर्ताओं ने पुराने आंकड़ों की विश्वसनीयता जांचने के लिए अमेरिकी सैनिकों के तापमान रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया। 1862 से 1930 के बीच दर्ज किए गए इन आंकड़ों में पहले जन्मे लोगों का औसत शरीर तापमान बाद में जन्मे लोगों की तुलना में ज्यादा पाया गया।
इसके अलावा, 1971 से 2017 के बीच जुटाए गए दो अन्य डेटा सेट में भी शरीर के तापमान में गिरावट का रुझान दिखाई दिया।
इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि शरीर के तापमान में कमी का कारण केवल पुराने थर्मामीटर नहीं हैं। इंसानों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और वातावरण में आए बदलावों की भी इसमें भूमिका हो सकती है।
शरीर का तापमान किन 4 बातों से प्रभावित होता है?
किसी भी व्यक्ति के शरीर का तापमान हमेशा एक जैसा नहीं रहता। यह कई सामान्य कारणों से दिनभर बदल सकता है।
1. उम्र: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ऊर्जा खर्च करने की प्रक्रिया और मेटाबॉलिज्म में बदलाव आ सकता है। शारीरिक गतिविधियां कम होने का असर भी शरीर के तापमान पर पड़ सकता है।
2. महिला या पुरुष होना: कुछ अध्ययनों में महिलाओं का औसत शरीर तापमान पुरुषों की तुलना में थोड़ा अधिक पाया गया है। हालांकि, इस अंतर के पीछे मौजूद कारणों को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।
3. दिन का समय: शरीर का तापमान सुबह के समय सामान्यतः कम और शाम को अधिक होता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, सुबह 3 से 5 बजे के बीच तापमान सबसे कम और शाम 4 से 6 बजे के बीच सबसे ज्यादा हो सकता है।
4. लंबाई और वजन: शरीर का आकार और वजन भी तापमान को प्रभावित कर सकते हैं। शरीर की बनावट, मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा खर्च करने की प्रक्रिया के आधार पर तापमान में अंतर हो सकता है।
क्या अब 37 डिग्री को सामान्य तापमान मानना सही नहीं है?
नई रिसर्च के बाद 37 डिग्री सेल्सियस को हर व्यक्ति के लिए सामान्य शरीर तापमान का एकमात्र पैमाना मानने पर सवाल उठे हैं। कई अध्ययनों में स्वस्थ वयस्कों का औसत तापमान इससे कम पाया गया है। कुछ मेडिकल किताबों और चिकित्सा डेटाबेस में भी नए शोध के आधार पर तापमान के औसत आंकड़ों को शामिल किया गया है।हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 37 डिग्री सेल्सियस तापमान असामान्य है या हर व्यक्ति का तापमान 36.4 डिग्री ही होना चाहिए। शरीर का तापमान उम्र, दिन के समय, शारीरिक गतिविधि और तापमान मापने के तरीके के अनुसार बदल सकता है।विशेषज्ञों की सलाह है कि केवल एक बार तापमान मापकर किसी व्यक्ति की सेहत का फैसला नहीं करना चाहिए। बुखार या बीमारी का आकलन करते समय व्यक्ति के अन्य लक्षणों और उसकी सामान्य शारीरिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

