Samachar Nama
×

Mecca Defence Pact: हूती खतरे के बीच सऊदी अरब को मिलेगा पाकिस्तान-तुर्किये का सैन्य सहयोग, तेजी से तैनाती पर फैसला
 

Mecca Defence Pact: हूती खतरे के बीच सऊदी अरब को मिलेगा पाकिस्तान-तुर्किये का सैन्य सहयोग, तेजी से तैनाती पर फैसला

यमन में हूती विद्रोहियों के बढ़ते सैन्य प्रभाव के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने अपनी रक्षा साझेदारी को सक्रिय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रियाद में 5 अक्टूबर को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत हुई आपात बैठक में तीनों देशों ने सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत करने और जरूरी सैन्य संसाधनों की तेजी से तैनाती पर सहमति जताई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी संयुक्त बयान में इसकी पुष्टि की है। 
सऊदी अरब में तेजी से तैनात होंगी सैन्य क्षमताएं
आपात बैठक में तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने का फैसला किया। संयुक्त बयान के मुताबिक, सहमति के अनुसार सैन्य बलों और क्षमताओं को सऊदी अरब में तेजी से तैनात करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक बयान में सैनिकों की निश्चित संख्या या तैनाती की कोई अंतिम तारीख नहीं बताई गई है। तैनाती संबंधित देशों के स्वीकृत प्रबंधों और राष्ट्रीय कानूनों के तहत होगी। 
हूतियों की बढ़ती गतिविधियों से बढ़ी चिंता
यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हाल के हफ्तों में संघर्ष तेज हुआ है। हूती लड़ाकों ने ग्रेटर हनीश, लेसर हनीश और मायून जैसे रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा किया था। बाब अल-मंदेब के आसपास उनकी मौजूदगी से लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। 
बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
यमनी सेना ने शुरू किया पलटवार
हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने भी सैन्य अभियान तेज किया है। 5 अक्टूबर को यमनी सरकार ने दावा किया कि उसकी सेना ने मोखा और बाब अल-मंदेब के पास कई रणनीतिक ठिकानों पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस अभियान में सऊदी हवाई समर्थन की भी खबर है। 
क्षेत्र में लड़ाई तेज होने के साथ ही हूती हमलों और सऊदी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर मक्का रक्षा समझौते की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
अगस्त में हुआ था मक्का संयुक्त रक्षा समझौता
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने अगस्त 2026 में संयुक्त रक्षा समझौता किया था। इसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति में इसे सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। सितंबर के अंत में तीनों देशों के सैन्य प्रमुखों ने भी बढ़ते हूती हमलों के बीच संभावित सहयोग पर चर्चा की थी। 
5 अक्टूबर की बैठक इस समझौते को जमीन पर लागू करने की दिशा में अब तक का सबसे महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आधिकारिक बयान में तीनों देशों ने सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई है। 
 

Share this story

Tags