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BLA में बड़ी आंतरिक कार्रवाई: ऑपरेशन नाकाम होने और सुसाइड बॉम्बर्स के इस्तेमाल से नाराज बलूच आर्मी ने निकाला अपना टॉप कमांडर

BLA में बड़ी आंतरिक कार्रवाई: ऑपरेशन नाकाम होने और सुसाइड बॉम्बर्स के इस्तेमाल से नाराज बलूच आर्मी ने निकाला अपना टॉप कमांडर

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के भीतर बड़ा नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। संगठन ने अपने शीर्ष कमांडर बशीर जेब बलूच को कमांडर-इन-चीफ के पद से हटा दिया है। 3 नवंबर को संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने इस फैसले की घोषणा की। इसके बाद संगठन की प्रशासनिक, सैन्य और नीतिगत जिम्मेदारियां फिलहाल सीनियर कमांड काउंसिल को सौंप दी गई हैं।

BLA ने आधिकारिक तौर पर इस बदलाव को संगठन के संवैधानिक नियमों के तहत नेतृत्व हस्तांतरण बताया है। हालांकि, सुरक्षा मामलों के जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसके पीछे संगठन के भीतर लंबे समय से चल रही नाराजगी, सैन्य रणनीति को लेकर मतभेद और ऑपरेशन हेरोफ-2 में हुए भारी नुकसान जैसे कारण हो सकते हैं।

खास तौर पर आत्मघाती हमलों में महिलाओं के इस्तेमाल को लेकर भी संगठन के भीतर और उससे बाहर आलोचना की चर्चा सामने आई है। हालांकि, BLA ने बशीर जेब को हटाने की आधिकारिक वजह के तौर पर इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

बशीर जेब की जगह फिलहाल सीनियर कमांड काउंसिल संभालेगी जिम्मेदारी

BLA के प्रवक्ता जीयंद बलूच के बयान के मुताबिक, संगठन के शीर्ष निकायों की संयुक्त बैठक 16 अक्टूबर को हुई थी। इस बैठक में कमांडरों ने नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति जताई। इसके बाद 3 नवंबर को सार्वजनिक रूप से बशीर जेब के कमांडर-इन-चीफ पद पर नहीं रहने की घोषणा की गई।संगठन के मुताबिक, नए कमांडर की नियुक्ति होने तक सीनियर कमांड काउंसिल सभी प्रशासनिक, सैन्य और नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी संभालेगी। नए कमांडर के नाम की घोषणा कब होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।

BLA ने यह भी दावा किया है कि नेतृत्व परिवर्तन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और इससे संगठन के भीतर कोई टूट या संघर्ष नहीं हुआ। संगठन का कहना है कि उसकी गतिविधियां और सैन्य अभियान पहले की तरह जारी रहेंगे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ऑपरेशन हेरोफ-2 बना नाराजगी की बड़ी वजह?

बशीर जेब को हटाए जाने के पीछे सैन्य रणनीति को लेकर मतभेदों की बात सामने आ रही है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के भीतर ऑपरेशन हेरोफ-2 को लेकर कई महीनों से असहमति चल रही थी।रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान 31 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसके दौरान बलूचिस्तान के कई इलाकों में एक साथ हमले किए गए। बताया जाता है कि संगठन के कुछ वरिष्ठ कमांडर बड़े पैमाने पर लड़ाकों को एक साथ अलग-अलग जगहों पर तैनात करने की रणनीति से सहमत नहीं थे।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मजीद ब्रिगेड से जुड़े कैप्टन रहमान गुल ने इस रणनीति पर सवाल उठाए थे। उनका कथित तौर पर मानना था कि बड़ी संख्या में लड़ाकों को एक साथ तैनात करने से सुरक्षा बलों को उनकी लोकेशन का पता लगाने और कार्रवाई करने का मौका मिल सकता है।इसके उलट, छोटे और मोबाइल समूहों के जरिए सीमित हमले करने की रणनीति को बेहतर माना जा रहा था। ऑपरेशन के दौरान हुए नुकसान के बाद संगठन के भीतर यह मतभेद और गहरा होने की बात कही गई है। 

भारी नुकसान के बाद कमजोर हुई संगठन की स्थिति?

PICSS की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑपरेशन हेरोफ-2 के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में BLA को भारी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर संगठन के कम से कम 215 लड़ाके मारे गए, जबकि संगठन ने खुद 96 मौतों को स्वीकार किया था।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़ी संख्या में लड़ाकों को एक साथ तैनात करने से उनकी गतिविधियों और ठिकानों की पहचान करना सुरक्षा बलों के लिए आसान हो गया।इसी घटनाक्रम के बाद बशीर जेब की संगठन के केंद्रीय फैसलों में भूमिका कमजोर होने और दूसरे वरिष्ठ कमांडरों का प्रभाव बढ़ने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों को संगठन की ओर से आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है।

महिला सुसाइड बॉम्बर्स के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल

बशीर जेब के नेतृत्व को लेकर विवाद की एक दूसरी वजह आत्मघाती हमलों की रणनीति भी बताई जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, BLA की मजीद ब्रिगेड द्वारा महिलाओं को आत्मघाती हमलों में शामिल किए जाने को लेकर आलोचना बढ़ी थी।विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के हमलों से संगठन की अंतरराष्ट्रीय छवि और बलूच आंदोलन के व्यापक समर्थन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। BBC Urdu की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सामने आई टिप्पणियों में भी महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, आत्मघाती हमलों और हिंसक गतिविधियों के कारण बलूचिस्तान से बाहर संगठन के प्रति समर्थन कमजोर हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल को लेकर उठी आलोचना बशीर जेब को पद से हटाने का सीधा कारण बनी या नहीं।

बशीर जेब का क्या होगा? उनके ठिकाने को लेकर भी सवाल

बशीर जेब को शीर्ष पद से हटाए जाने के बाद उनके वर्तमान ठिकाने और स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सोशल मीडिया पर उनके जहर दिए जाने और अफगानिस्तान के कंधार से भारत ले जाए जाने जैसे दावे किए गए हैं।हालांकि, इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि बशीर जेब संगठन में किसी दूसरी भूमिका में रहेंगे या पूरी तरह अलग हो जाएंगे। इसलिए उनके बारे में चल रही अपुष्ट खबरों को सच मानना उचित नहीं होगा। 

BLA में पहले भी हो चुकी है नेतृत्व को लेकर टूट

BLA के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2017 में बशीर जेब और उनके पूर्ववर्ती असलम बलूच को हायरबयार मारी के नेतृत्व वाले मूल BLA गुट से अलग कर दिया गया था। इसके बाद असलम बलूच ने अलग गुट बनाया और बशीर जेब ने उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।दिसंबर 2018 में असलम बलूच की आत्मघाती हमले में मौत के बाद बशीर जेब ने संगठन की कमान संभाली थी। करीब आठ साल तक शीर्ष नेतृत्व में रहने के बाद अब उन्हें कमांडर-इन-चीफ के पद से हटाए जाने की घोषणा हुई है। 

आगे क्या होगा?

बशीर जेब को हटाए जाने के बाद BLA के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए नेतृत्व का चयन और संगठन के भीतर मतभेदों को संभालना है। एक तरफ संगठन इसे नियमों के तहत सामान्य नेतृत्व परिवर्तन बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा विशेषज्ञ इसे सैन्य रणनीति और आंतरिक असंतोष से जुड़ा घटनाक्रम मान रहे हैं।अब सबकी नजर इस बात पर है कि सीनियर कमांड काउंसिल नया कमांडर किसे नियुक्त करती है और क्या यह बदलाव संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म कर पाएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि BLA के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव हुआ है, लेकिन इसके पीछे के वास्तविक कारणों को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।

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