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यूक्रेन-रूस युद्ध पर बड़ी कूटनीतिक पहल, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें अबू धाबी में अमेरिका की मौजूदगी में पहली त्रिपक्षीय वार्ता आज

यूक्रेन-रूस युद्ध पर बड़ी कूटनीतिक पहल, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें अबू धाबी में अमेरिका की मौजूदगी में पहली त्रिपक्षीय वार्ता आज

यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच आज अबू धाबी में एक अहम त्रिपक्षीय वार्ता होने जा रही है। रूस द्वारा फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद यह तीनों देशों की पहली संयुक्त बैठक होगी। दो दिवसीय इस बैठक को यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, बातचीत से पहले ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर यह कि क्या यह बैठक किसी ठोस समाधान की ओर बढ़ पाएगी या नहीं।

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक इस त्रिपक्षीय वार्ता का रास्ता गुरुवार को तब साफ हुआ, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशर ने मुलाकात की। इसी उच्चस्तरीय बैठक के बाद अबू धाबी में यूक्रेन-रूस-अमेरिका की संयुक्त वार्ता पर सहमति बनी। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

रूस की ओर से इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उसकी सैन्य खुफिया एजेंसी (जीआरयू) के निदेशक जनरल इगोर कोस्ट्यूकोव करेंगे। यह संकेत देता है कि रूस इस बातचीत को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम मान रहा है। वहीं, अमेरिका की भूमिका एक मध्यस्थ और प्रभावशाली शक्ति के रूप में देखी जा रही है, जबकि यूक्रेन अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अखंडता के सवाल पर स्पष्ट रुख के साथ बैठक में शामिल होने जा रहा है।

हालांकि, अबू धाबी में होने वाली इस बातचीत का पूरा एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि रूसी और यूक्रेनी अधिकारी सीधे आमने-सामने बैठकर वार्ता करेंगे या अलग-अलग प्रारूप में बातचीत होगी। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता को लेकर कई बार असमंजस की स्थिति रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सबसे अहम मुद्दा जमीन को लेकर विवाद रहने वाला है। रूस पहले ही साफ कर चुका है कि उसकी प्रमुख मांग यूक्रेन के डोनेत्स्क क्षेत्र से जुड़ी है। राष्ट्रपति पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क के उस लगभग 20 प्रतिशत हिस्से को छोड़ दे, जिस पर अब भी यूक्रेनी सेना का नियंत्रण है। रूस इस क्षेत्र को रणनीतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण मानता है।

वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की इस मुद्दे पर सख्त रुख अपना चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 2022 से अब तक भारी जान-माल के नुकसान और संघर्ष के बावजूद यूक्रेन ने जिन इलाकों की रक्षा की है, उन्हें किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा। यूक्रेन का मानना है कि जमीन छोड़ना उसकी संप्रभुता और जनता के बलिदान का अपमान होगा।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि अबू धाबी वार्ता भले ही किसी तत्काल समझौते तक न पहुंचे, लेकिन यह संवाद की बहाली की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या यह युद्ध के समाधान की ओर बढ़ेगी या फिर मतभेद और गहरे होंगे।

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