Samachar Nama
×

ब्रिटेन की गुलामी के इतिहास पर किंग चार्ल्स को हुआ गहरा दुख: बोले- यह इतिहास का शर्मनाक अध्याय, इसे याद कर दिल में उठता है खौफ

ब्रिटेन की गुलामी के इतिहास पर किंग चार्ल्स को हुआ गहरा दुख: बोले- यह इतिहास का शर्मनाक अध्याय, इसे याद कर दिल में उठता है खौफ

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने अपने देश के गुलामी के इतिहास को लेकर गहरा दुख जाहिर किया है। उन्होंने अटलांटिक पार गुलामों के व्यापार को इतिहास का शर्मनाक अध्याय बताते हुए कहा कि इस दौर को याद करने से उनका दिल खौफ से भर जाता है और आत्मा को गहरी पीड़ा होती है। किंग चार्ल्स ने यह बात 3 नवंबर को एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) के उद्घाटन समारोह में कही। इस बैठक में राष्ट्रमंडल देशों के कई राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री शामिल हुए।

किंग चार्ल्स ने अपने संबोधन में कहा कि गुलामों का व्यापार आज भी कैरेबियाई द्वीपों और राष्ट्रमंडल के कई अन्य देशों पर अपनी छाया बनाए हुए है। उन्होंने कहा, "इतिहास का वह शर्मनाक अध्याय मेरे दिल में खौफ और मेरी आत्मा में गहरा व्यक्तिगत दुख पैदा करता है।" उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि बुराई को हमेशा आखिरी जीत नहीं मिलती। साहस और दृढ़ संकल्प के जरिए बड़े से बड़े अन्याय का मुकाबला किया जा सकता है।

औपचारिक माफी नहीं मांगी, भविष्य में सुधार पर दिया जोर

किंग चार्ल्स ने अपने भाषण में गुलामी के इतिहास पर दुख तो जताया, लेकिन ब्रिटेन की ओर से औपचारिक माफी नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि हम अतीत में अपने पूर्वजों के किए गए कामों को बदल नहीं सकते, लेकिन उनसे सीख जरूर सकते हैं। उनके मुताबिक, इतिहास में उपलब्धियां भी हैं और गलतियां भी। इसलिए अतीत को समझना और उससे सबक लेना जरूरी है।उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अन्याय के प्रभावों को कम करने के लिए राष्ट्रमंडल देशों को आधुनिक साझेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इसके तहत शिक्षा तक पहुंच बेहतर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, राष्ट्रमंडल देशों के बीच व्यापार को प्रोत्साहित करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों पर जोर दिया।

ब्रिटिश राजपरिवार के इतिहास पर भी उठते रहे हैं सवाल

ब्रिटिश राजपरिवार का इतिहास भी गुलामों के व्यापार से जुड़ा रहा है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ब्रिटेन के शुरुआती गुलाम व्यापारियों में शामिल जॉन हॉकिन्स की गतिविधियों का समर्थन किया था। वहीं, चार्ल्स द्वितीय के शासनकाल में इस व्यापार के विस्तार को बढ़ावा मिला। बाद में गुलामी खत्म करने के लिए चले अभियानों का विरोध भी शाही परिवार से जुड़े लोगों ने किया था।

माफी और ऐतिहासिक न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी

किंग के संबोधन के दौरान बैठक स्थल के बाहर कुछ प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटेन से गुलामी के इतिहास को लेकर माफी मांगने और उसके प्रभावों की भरपाई के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिनमें ब्रिटेन से अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करने और न्याय की दिशा में कार्रवाई करने की अपील की गई थी।यह मुद्दा ऐसे समय फिर चर्चा में आया है, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने गुलामी के इतिहास पर औपचारिक माफी की संभावना को लेकर बातचीत के लिए तैयार रहने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने आर्थिक मुआवजे यानी रिपेरेशंस की मांग को स्वीकार नहीं किया है।किंग चार्ल्स के बयान को ब्रिटेन के गुलामी के इतिहास और उसके वर्तमान प्रभावों पर राष्ट्रमंडल देशों के बीच जारी चर्चा के संदर्भ में देखा जा रहा है।

Share this story

Tags