100 साल से भी अधिक जी रहे जापानी: 1 लाख लोगों का आंकड़ा पार, 88% महिलाएं; जानिए क्या है इनकी लंबी उम्र का राज
जापान में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या पहली बार 1 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब 1,07,677 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 100 साल या उससे अधिक है।
इनमें महिलाओं की संख्या करीब 94,300, जबकि पुरुषों की संख्या लगभग 13,400 है। यानी 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में करीब 88 फीसदी महिलाएं हैं। पिछले साल के मुकाबले इस आयु वर्ग की आबादी में लगभग 8 हजार का इजाफा हुआ है।
जापान में लंबी उम्र के पीछे क्या वजह है?
हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सोशल साइंस प्रोफेसर स्टुअर्ट गीटेल-बास्टेन के मुताबिक जापान में लोगों की लंबी उम्र के पीछे कई कारण हैं।
इनमें स्वस्थ खान-पान, रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, सस्ती और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं तथा नियमित स्वास्थ्य जांच जैसे कारण शामिल हैं।
जापान लंबे समय से दुनिया के उन देशों में शामिल रहा है, जहां औसत जीवन प्रत्याशा काफी ज्यादा है।
महिलाओं की उम्र ज्यादा होने की 3 बड़ी वजहें
1. जीवनशैली का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक जिस पीढ़ी के लोग आज 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं, उस पीढ़ी के पुरुषों में धूम्रपान और शराब का सेवन अपेक्षाकृत ज्यादा था। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुरुष औद्योगिक और शारीरिक मेहनत वाले कामों में भी शामिल थे। लंबे समय में इन आदतों और काम की परिस्थितियों का स्वास्थ्य पर असर पड़ा।
2. सामाजिक जुड़ाव
उम्र बढ़ने के बाद भी महिलाओं को सामाजिक जुड़ाव का फायदा मिला। कई पुरुष रिटायरमेंट या जीवनसाथी की मृत्यु के बाद सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ गए, जबकि महिलाएं परिवार और समुदाय के साथ ज्यादा जुड़ी रहीं। इससे उन्हें सामाजिक और मानसिक स्तर पर सहारा मिला।
3. द्वितीय विश्वयुद्ध का असर
इस पीढ़ी में महिलाओं की संख्या ज्यादा होने के पीछे एक ऐतिहासिक कारण भी बताया जाता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान के करीब 23 लाख सैनिक मारे गए थे और उनमें लगभग सभी पुरुष थे। युद्ध में बड़ी संख्या में पुरुषों की मौत का असर उस पीढ़ी के पुरुष-महिला अनुपात पर भी पड़ा।
107 साल के तेत्सुओ सातो आज भी खुद करते हैं कई काम
निगाता प्रांत के पहाड़ी इलाके ओसोनोगो गांव में रहने वाले तेत्सुओ सातो भी जापान के 100 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों में शामिल हैं। वह जल्द ही 107 साल के होने वाले हैं।
सातो अपने बेटे, बहू, कुत्ते और बिल्ली के साथ रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ उनकी सुनने और देखने की क्षमता कमजोर हुई है, लेकिन इसके बावजूद वह खुद को व्यस्त रखते हैं।
वह पुराने कैलेंडर और रैपिंग पेपर से नोटबुक बनाते हैं। इसके अलावा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इम्फाल की लड़ाई से जुड़े अपने अनुभवों की कहानियां भी सुनाते हैं।
उनकी 68 वर्षीय बहू कुनिको सातो के मुताबिक, उनके ससुर आज भी अधिकतर काम खुद करने की कोशिश करते हैं और बिना मदद के नहाने जैसे रोजमर्रा के काम कर लेते हैं।
जब पिछले साल कुनिको के पैर में चोट लगी थी, तब सातो ने अपने चावल के कटोरे खुद धोने शुरू कर दिए थे। परिवार के मुताबिक, अब दोनों उम्र के इस पड़ाव पर एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं।
सातो का लक्ष्य कभी 100 साल तक जीना था। अब वह 110 साल की उम्र तक पहुंचना चाहते हैं।
एक तरफ 100 साल से ज्यादा उम्र वालों की संख्या बढ़ी, दूसरी तरफ आबादी घट रही
जापान में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन देश की कुल आबादी लगातार कम हो रही है। जापान की आबादी वर्ष 2008 में करीब 12.8 करोड़ के साथ अपने उच्चतम स्तर पर थी।
सरकारी अनुमान के मुताबिक 2070 तक देश की आबादी घटकर करीब 8.7 करोड़ रह सकती है। यानी आने वाले दशकों में जापान की आबादी 4 करोड़ से ज्यादा कम हो सकती है।
वर्तमान में जापान में हर एक बच्चे के जन्म के मुकाबले करीब दो लोगों की मौत हो रही है। इसका सीधा असर देश की कामकाजी आबादी पर पड़ रहा है।
काम करने वाले लोगों की संख्या कम हो रही है, जबकि बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। इससे सरकार पर टैक्स और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े खर्च का दबाव बढ़ रहा है।
5 साल में 31 लाख कम हुई जापान की आबादी
2020 से 2025 के बीच जापान की आबादी करीब 31 लाख कम हुई। वर्ष 2020 में देश की आबादी लगभग 12.61 करोड़ थी, जो 2025 में घटकर करीब 12.3 करोड़ रह गई।
1920 में आधुनिक जनगणना शुरू होने के बाद यह आबादी में दर्ज सबसे बड़ी गिरावट बताई जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, जापान के 47 प्रांतों में से 45 की आबादी 2025 में कम हुई। केवल दो प्रांत ऐसे रहे, जहां आबादी में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
गांव खाली हो रहे, स्कूलों की जगह बन रहे नर्सिंग होम
जापान के ग्रामीण इलाकों में आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। पढ़ाई और नौकरी के लिए युवा टोक्यो, ओसाका और नागोया जैसे बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं।
इसका असर गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह बच्चों की संख्या बेहद कम होने के कारण स्कूल बंद किए गए हैं। कुछ इलाकों में पुराने स्कूल भवनों को नर्सिंग होम और सामुदायिक केंद्रों में बदला जा रहा है।
देश में बड़ी संख्या में घर खाली पड़े हैं। कई क्षेत्रों में सरकारी दफ्तर और अस्पताल अपनी सेवाओं का दायरा कम कर रहे हैं। कुछ इलाकों में ट्रेन सेवाएं भी बंद की जा रही हैं।
टोक्यो में बढ़ रही आबादी, बाकी जापान में गिरावट
जापान के ज्यादातर हिस्सों में आबादी घट रही है, लेकिन टोक्यो और उसके आसपास का इलाका अभी भी लोगों को आकर्षित कर रहा है।
2025 में टोक्यो मेट्रो क्षेत्र की आबादी करीब 3.7 करोड़ थी। इसमें टोक्यो के अलावा कनागावा, सैतामा और चिबा प्रांत शामिल हैं। यह क्षेत्र जापान की कुल आबादी का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा रखता है।
टोक्यो की अपनी आबादी भी 2025 में 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर करीब 1.42 करोड़ हो गई। पढ़ाई और रोजगार के लिए युवाओं का टोक्यो पहुंचना इसकी बड़ी वजहों में शामिल है।
आबादी की कमी रोकने के लिए विदेशियों को बसाने पर बहस
जापान में घटती आबादी और कामकाजी लोगों की कमी से निपटने के लिए कुछ विशेषज्ञ ज्यादा विदेशियों को काम करने और देश में रहने की अनुमति देने का सुझाव देते हैं। उनका मानना है कि इससे श्रमिकों की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है।
हालांकि, जापान में इस मुद्दे पर मतभेद भी हैं। कुछ लोग विदेशियों की संख्या बढ़ाने के बजाय इमिग्रेशन नियमों को और सख्त करने की मांग करते हैं।
इस तरह जापान एक अनोखी जनसांख्यिकीय स्थिति का सामना कर रहा है—एक तरफ 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ जन्मदर में गिरावट के कारण देश की कुल आबादी तेजी से घट रही है।

