जापान ने 5 दशकों पुरानी हथियार निर्यात नीति बदली, वीडियो में जानें रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव, ऑस्ट्रेलिया के साथ 7 अरब डॉलर का समझौता
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाई गई अपनी शांतिवादी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए जापान ने अब घातक हथियारों के निर्यात पर लगी दशकों पुरानी रोक को हटा दिया है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची की कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले को जापान की सुरक्षा और वैश्विक रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
नए निर्णय के तहत अब जापान फाइटर जेट, मिसाइल और युद्धपोत (वॉरशिप) जैसे उन्नत सैन्य उपकरणों का निर्यात अन्य देशों को कर सकेगा। यह कदम जापान की लंबे समय से चली आ रही उस नीति से अलग है, जिसमें वह सैन्य उपकरणों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए रखता था।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि अब सभी प्रकार के रक्षा उपकरणों का हस्तांतरण संभव होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हथियार केवल उन्हीं देशों को दिए जाएंगे जो संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के अनुरूप उनके उपयोग की गारंटी देंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जापान से निर्यात किए गए हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ही किया जाए।
जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस नीति परिवर्तन के बाद कई देश जापानी रक्षा उपकरणों को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। मंत्रालय का मानना है कि जापान की उन्नत तकनीक और विश्वसनीय रक्षा निर्माण क्षमता इसे वैश्विक हथियार बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बना सकती है।
इस बीच, जापान ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता भी किया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 7 अरब डॉलर बताई जा रही है। इस समझौते के तहत जापान की प्रमुख रक्षा कंपनी मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए 11 युद्धपोतों में से पहले तीन का निर्माण करेगी। यह सौदा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जापान का यह निर्णय एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच लिया गया है। चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों की सैन्य गतिविधियों को देखते हुए जापान अब अपनी रक्षा नीति को अधिक सक्रिय और व्यावहारिक दिशा में ले जा रहा है।
हालांकि, इस बदलाव को लेकर जापान के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम देश की पारंपरिक शांतिवादी छवि को प्रभावित कर सकता है, जबकि समर्थकों का कहना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह आवश्यक रणनीतिक निर्णय है। फिलहाल, जापान का यह नीतिगत बदलाव अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार और एशियाई सुरक्षा संतुलन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

