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हिंसक प्रदर्शन रोकने के लिए इटली का सख्त कानून: नाबालिगों की तोड़फोड़ पर पेरेंट्स भरेंगे जुर्माना, 5 साल की जेल

हिंसक प्रदर्शन रोकने के लिए इटली का सख्त कानून: नाबालिगों की तोड़फोड़ पर पेरेंट्स भरेंगे जुर्माना, 5 साल की जेल

इटली में हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सुरक्षा से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दी है। इन नियमों के तहत हिंसा में शामिल लोगों को पांच साल तक की जेल और करीब 21 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, नाबालिगों की ओर से किए गए नुकसान की भरपाई उनके माता-पिता से कराने और 14 साल से अधिक उम्र के बच्चों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आसान बनाने का प्रावधान भी किया गया है।यह फैसला मिलान में 17 और 18 अक्टूबर को हुई हिंसा के बाद लिया गया। इन घटनाओं के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दुकानों में लूटपाट, वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी करने के आरोप लगे थे। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति और लोगों की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्ती जरूरी है।

मिलान में साल के अंत तक तैनात होंगे 500 अतिरिक्त सैनिक

मिलान में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार ने साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में हिंसा में युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी पर चिंता जताई।मेलोनी के मुताबिक, 17 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई युवा तोड़फोड़ और चोरी करने के साथ-साथ इन घटनाओं के वीडियो बनाने के लिए भी आए थे। उन्होंने कहा कि हिंसा से जुड़े वीडियो देखकर दूसरे युवाओं के भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होने का खतरा है। इसलिए इस समस्या से गंभीरता से निपटना जरूरी है।

चेहरा ढककर हिंसा करने पर बढ़ सकती है सजा

सरकार के नए नियमों के तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल होने को अलग अपराध के रूप में देखा जाएगा। यदि कोई आरोपी चेहरा ढककर हिंसा करता है या उसकी गतिविधियों से किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है, तो उस पर अधिक सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

दुकानों, वाहनों या अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को उसकी भरपाई भी करनी पड़ सकती है। नाबालिगों की ओर से किए गए नुकसान के लिए उनके माता-पिता की जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान भी नए नियमों में शामिल है।हालांकि, सरकार के आदेश को स्थायी कानून बनाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। संसद को 60 दिनों के भीतर इस आदेश को कानून में बदलना होगा।

14 साल से ज्यादा उम्र के नाबालिगों पर कार्रवाई होगी आसान

नए नियमों में किशोरों की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसके तहत 14 साल से अधिक उम्र के बच्चों को सामान्य रूप से अपने काम के परिणाम समझने में सक्षम माना जाएगा। यदि कोई यह साबित करना चाहता है कि संबंधित बच्चा अपने कृत्य की प्रकृति और नतीजों को समझने में सक्षम नहीं था, तो उसे इसके समर्थन में सबूत देने होंगे।

अब तक नाबालिग की समझ और उसके काम के परिणामों को पहचानने की क्षमता का आकलन करने में जज की भूमिका अहम थी। नए प्रावधानों से इस प्रक्रिया में बदलाव होने की उम्मीद है।मेलोनी ने यह भी कहा कि सरकार हिरासत केंद्रों में जगह बढ़ाएगी और किशोर न्याय व्यवस्था में जजों की संख्या बढ़ाने पर काम करेगी, ताकि नाबालिगों से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

दो दिन की हिंसा में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल

मिलान के प्रमुख खरीदारी क्षेत्र में 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। कई प्रदर्शनकारियों ने चेहरे ढक रखे थे। आरोप है कि उन्होंने पुलिस के साथ झड़प की, दुकानों में लूटपाट की और संपत्ति को आग लगाई। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

18 अक्टूबर को भी हिंसा और लूटपाट की घटनाएं जारी रहने की खबरें सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों दिनों की घटनाओं में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।मिलान पुलिस ने बताया कि 17 अक्टूबर की रात करीब 2,000 युवा हिंसा में शामिल थे। इनमें इटली में विदेशी माता-पिता के यहां जन्मे और बाद में नागरिकता प्राप्त करने वाले लोग तथा दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल थे।रिपोर्ट के अनुसार, अब तक करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 30 से अधिक नाबालिग बताए गए हैं।

महंगाई और सरकारी सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी

इटली में प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, कम वेतन, महंगे मकान और किराए के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं की स्थिति को लेकर नाराजगी भी बताई जा रही है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों की कमाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। आवास और किराए का बढ़ता खर्च भी आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।

इन मुद्दों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने और हिंसा पर रोक लगाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर महंगाई और जीवनयापन की लागत से जुड़ी शिकायतों का समाधान करने का दबाव भी है।

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