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Israel Election: चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते नेतन्याहू, बोले- जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे

Israel Election: चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते नेतन्याहू, बोले- जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि वह 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करना चाहते। बुधवार को इजराइली आर्मी रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना उचित नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान इजराइल पर हमला करता है, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।

नेतन्याहू के मुताबिक, यदि ईरान इजराइल पर मिसाइलें दागता है, तो उनके राजनीतिक विरोधी इसके लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराएंगे। विपक्ष लगातार आशंका जता रहा है कि प्रधानमंत्री चुनाव से पहले ईरान के साथ संघर्ष शुरू कर सकते हैं।

ईरान और इजराइल के बीच तनाव बरकरार

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों को निशाना बनाया था। जून के बाद से दोनों देशों के बीच सीधे हमले नहीं होने की बात कही गई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

नेतन्याहू ने दावा किया कि मध्य पूर्व के कई देश इजराइल की सैन्य सफलताओं के बाद उससे संपर्क कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इजराइल सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों से बचाने में कोई सहायता दे रहा है या नहीं।

7 अक्टूबर के हमले का मुद्दा चुनाव में अहम

टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी चुनाव में नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की संभावनाएं बनी हुई हैं। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। इस हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

विपक्ष का आरोप है कि नेतन्याहू ने सुरक्षा में हुई चूक की राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं ली। हमले की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने की मांग भी उठी, लेकिन इस मुद्दे पर विवाद जारी रहा।

इसके बावजूद विपक्ष अब तक प्रधानमंत्री को चुनौती देने के लिए पूरी तरह एकजुट नहीं हो पाया है। कुछ चुनावी सर्वेक्षणों में विपक्षी दल आगे दिखाई देते हैं, जबकि कुछ में नेतन्याहू के गठबंधन को बढ़त मिलती नजर आती है।

विपक्षी दलों के मतभेद बन सकते हैं नेतन्याहू की ताकत

इजराइल में विपक्षी नेताओं के बीच एकजुटता की कमी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट और एविगडोर लिबरमैन जैसे नेता नेतन्याहू को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन विपक्ष की साझा रणनीति को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

दूसरी ओर, नेतन्याहू टीवी कार्यक्रमों, सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए अपने समर्थकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी रणनीति दक्षिणपंथी दलों के बीच वोटों का बंटवारा रोकने पर भी केंद्रित है।

120 सीटों वाली संसद में 61 का आंकड़ा जरूरी

इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। चुनावी व्यवस्था के तहत किसी पार्टी को संसद में प्रवेश के लिए कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी है।

ऐसे में छोटी पार्टियों का प्रदर्शन भी चुनाव का नतीजा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि कोई पार्टी न्यूनतम वोट सीमा तक नहीं पहुंचती, तो उसे संसद में सीटें नहीं मिलेंगी। इससे अन्य दलों और गठबंधनों की सरकार बनाने की संभावनाएं बदल सकती हैं।

फिलहाल, नेतन्याहू के लिए चुनाव से पहले ईरान के साथ तनाव को संभालना और घरेलू सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब देना बड़ी राजनीतिक चुनौती बना हुआ है।

नोट: मूल खबर में ईरान पर हमलों की तारीखों, सऊदी अरब पर हमले और चुनाव की तारीख से जुड़े दावों को प्रकाशित करने से पहले विश्वसनीय स्रोत से सत्यापित कर लें।

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