Israel Election: चुनाव में विदेशी दखल के आरोपों की जांच करेगा मोसाद, कतर पर वोटरों को पैसे देने का शक
इजराइल में हाल ही में हुए चुनाव को लेकर विदेशी हस्तक्षेप के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की जांच के लिए देश की खुफिया एजेंसी मोसाद और आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को शामिल किए जाने की खबर है। इजराइली न्यूज चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या कतर या अन्य देशों ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए कोई गतिविधि की थी।
आरोप है कि अरब मतदाताओं को पैसे देकर मतदान बढ़ाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इजराइल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि जांच सीमित दायरे में है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका चुनाव परिणामों पर असर नहीं पड़ा है।
अरब पार्टियों का प्रदर्शन चर्चा में
चुनाव में अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलने की बात सामने आई है। इसे उनके राजनीतिक प्रदर्शन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस नतीजे के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए हैं।
विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों के बीच जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि क्या मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी बाहरी पक्ष ने धन या अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया था। फिलहाल, केवल आरोपों के आधार पर किसी देश या राजनीतिक दल की भूमिका को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
चुनाव परिणामों पर असर नहीं पड़ने की बात
इजराइल के केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक, जांच का दायरा सीमित है। आयोग ने कहा है कि सामने आए मामले से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ने की बात नहीं है। इसका मतलब है कि जांच और चुनाव परिणामों की वैधता को अलग-अलग पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है।
मोसाद और शिन बेट की जांच में यदि किसी तरह के विदेशी हस्तक्षेप के सबूत मिलते हैं, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
नेतन्याहू के सहयोगी दल ने विपक्षी नेता के समर्थन का संकेत दिया
इजराइल की राजनीति में एक और घटनाक्रम चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड टोरा जूडिज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने के प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही है। इस दल को चुनाव में सात सीटें मिलने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी ने समर्थन के बदले हरेदी समुदाय के लोगों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की मांग की है। यह मुद्दा इजराइल की राजनीति में लंबे समय से विवाद का विषय रहा है।
हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा से छूट का मुद्दा
इजराइल में अधिकांश यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, जबकि हरेदी समुदाय के धार्मिक छात्रों को लंबे समय से विशेष छूट मिलती रही है। इस व्यवस्था को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस चलती रही है।
सैन्य सेवा में छूट का सवाल सरकार गठन और राजनीतिक दलों के बीच समर्थन की बातचीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी दल की शर्तों को स्वीकार किया जाता है, तो इसका असर सैन्य भर्ती नीति और गठबंधन की राजनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल, विदेशी हस्तक्षेप की जांच और सरकार गठन से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। जांच के निष्कर्ष और विभिन्न दलों के अंतिम रुख से ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

