डोनबास पर कब्जे के बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करने से डरते हैं पुतिन? वीडियो में बोले- ‘वे मुझे फांसी पर लटका देंगे’
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश मैगजीन द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर रूस पूरे डोनबास पर कब्जा किए बिना युद्ध खत्म करता है, तो इसे उनकी कमजोरी और हार के तौर पर देखा जा सकता है। इससे रूस के राजनीतिक और प्रभावशाली तबकों में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ने के साथ उनकी सत्ता के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
रिपोर्ट में क्रेमलिन के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि युद्ध के संभावित नतीजों पर चर्चा के दौरान पुतिन ने अपने करीबियों से कथित तौर पर कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” हालांकि, द इकोनॉमिस्ट ने इस कथित टिप्पणी का सटीक समय और संदर्भ स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए इसे पुतिन के निजी विचार के रूप में रिपोर्ट किया गया दावा ही माना जाना चाहिए।
डोनबास को क्यों माना जा रहा है अहम?
डोनबास पूर्वी यूक्रेन का वह क्षेत्र है जिसमें मुख्य रूप से डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्र शामिल हैं। रूस ने युद्ध के दौरान इस इलाके पर कब्जे को अपने प्रमुख सैन्य और राजनीतिक उद्देश्यों में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन के लिए पूरे डोनबास पर नियंत्रण हासिल करना रूस के न्यूनतम युद्ध लक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।रिपोर्ट में कहा गया है कि पुतिन के सामने मुश्किल स्थिति है। एक तरफ युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने से रूस के आर्थिक संसाधनों और राजनीतिक पूंजी पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिना बड़ी उपलब्धि के युद्ध खत्म करना भी उनके लिए जोखिम भरा माना जा रहा है। रूस के अभिजात वर्ग के कुछ लोगों में युद्ध की लंबाई और उसकी लागत को लेकर असंतोष बढ़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
‘कमजोर नेता सत्ता में नहीं टिक सकता’
द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, पुतिन की सोच में रूस की राजनीतिक व्यवस्था में कमजोरी दिखाना बेहद खतरनाक हो सकता है। अगर युद्ध को रूस की घोषित बड़ी मांगें पूरी किए बिना समाप्त किया जाता है, तो इसे सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर पुतिन की विफलता के रूप में देखा जा सकता है।यही वजह बताई गई है कि पुतिन युद्ध समाप्त करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा स्थिति में युद्ध को उसी तरह जारी रखना भी क्रेमलिन के लिए फायदेमंद नहीं है, क्योंकि इससे आर्थिक संसाधनों और राजनीतिक ताकत की लगातार खपत हो रही है।
युद्ध और बढ़ाने की आशंका
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा गतिरोध से निकलने के लिए रूस युद्ध को और तेज करने का रास्ता चुन सकता है। कुछ सूत्रों के हवाले से अतिरिक्त सैनिकों की भर्ती और सैन्य अभियान तेज करने की संभावनाओं का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।इस तरह डोनबास अब सिर्फ युद्ध का एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि पुतिन के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा और सत्ता से जुड़ा मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि, पुतिन के वास्तविक निजी विचारों और भविष्य की रणनीति को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना मुश्किल है, क्योंकि रिपोर्ट में दिए गए प्रमुख दावे गुमनाम सूत्रों पर आधारित हैं।

