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ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से पहले खाड़ी इलाके में तनाव बढ़ गया है। *द जेरूसलम पोस्ट* की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के IRGC ने मंगलवार सुबह कुवैत में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर कम से कम तीन ड्रोन से हमला किया। अभी तक किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने बताया कि ओमान के तट के पास एक कार्गो जहाज पर किसी अज्ञात चीज़ से हमला हुआ। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है और जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि उसके पास डील का आखिरी मौका है, और दोहराया कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका मिलिट्री एक्शन से पीछे नहीं हटेगा।

1. **अमेरिका-ईरान बातचीत की तारीख और जगह अभी तय नहीं:** अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत की तारीख और जगह अभी तय नहीं हुई है। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान और कतर पर संभावित मेजबान देशों के तौर पर चर्चा हो रही है, और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।

2. **ईरान की नई रणनीति—युद्ध के बजाय अमेरिका पर दबाव बढ़ाना:** रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान सीधी सैन्य जीत के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और अहम शिपिंग रूट पर दबाव डालकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए मुश्किलें बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है।

3. **ईरान का दावा: होर्मुज के ऊपर रीपर ड्रोन मार गिराया:** IRGC ने दावा किया है कि उसने अपने एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करके होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, ड्रोन किस देश का था, इसका खुलासा नहीं किया गया है।

4. **अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रहा है:** CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने मिलिट्री एनालिस्ट से ईरान पर दबाव बढ़ाने और उसे दंडित करने के तरीकों पर नए सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों ने इसे एक असामान्य कदम बताया है। 

5. हूथी धमकियों के बाद सऊदी के छह सुपरटैंकरों ने बदला रूट: यमन के हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बाद, सऊदी के छह सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होते हुए लंबा समुद्री रास्ता अपनाया। इससे इलाके में शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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