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Iran War: हिंद महासागर तक पहुंच सकती है जंग? ईरान की चेतावनी से बढ़ा तनाव, भारत पर भी पड़ सकता है असर

Iran War: हिंद महासागर तक पहुंच सकती है जंग? ईरान की चेतावनी से बढ़ा तनाव, भारत पर भी पड़ सकता है असर

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच अब हिंद महासागर को लेकर भी बड़ी चेतावनी सामने आई है। ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने कहा है कि अगर अमेरिका या इजराइल की ओर से ईरान पर दोबारा हमला किया जाता है, तो युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है और यह हिंद महासागर तक पहुंच सकता है।

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, सफावी ने कहा कि संघर्ष पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच चुका है। ऐसे में नए हमलों की स्थिति में युद्ध का मोर्चा हिंद महासागर और उससे आगे तक फैलने की संभावना हो सकती है। यह बयान ईरान की सरकारी मीडिया फर्स न्यूज एजेंसी की ओर से जारी वीडियो में सामने आया है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?

हिंद महासागर पश्चिम एशिया और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का अहम रास्ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है। ऐसे में अगर सैन्य तनाव फारस की खाड़ी, लाल सागर से आगे समुद्री इलाकों तक बढ़ता है, तो तेल टैंकरों और दूसरे कारोबारी जहाजों की आवाजाही पर जोखिम बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक समुद्री रास्तों में अस्थिरता रहने पर शिपिंग लागत, बीमा खर्च और ऊर्जा कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। भारत के साथ-साथ चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

मार्च में भी हिंद महासागर तक पहुंचा था संघर्ष

ईरान की ताजा चेतावनी ऐसे समय आई है जब मार्च में भी संघर्ष का असर हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंचा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी हमले में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena श्रीलंका के तट के पास डूब गया था।

रिपोर्टों में बताया गया था कि युद्धपोत श्रीलंका के गाले शहर से करीब 19 नॉटिकल मील दूर डूबा, जो श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी EEZ के भीतर आता है। इस घटना में बड़ी संख्या में ईरानी सैनिकों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं।

UN में पजशकियान ने ट्रंप पर साधा निशाना

ईरान की यह चेतावनी ऐसे वक्त आई है जब राष्ट्रपति मसूद पजशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क में हैं।

UN महासभा में अपने भाषण के दौरान पजशकियान ने अमेरिकी दबाव और धमकियों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बावजूद कूटनीतिक बातचीत जारी रखने की कोशिशें भी चल रही हैं।

ट्रंप ने UN में ईरान को दी कड़ी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर को UN महासभा में अपने भाषण के दौरान ईरान के खिलाफ बेहद सख्त बयान दिया। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अगर शांति समझौता नहीं होता है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और आगे बढ़ा सकता है और उन्होंने ईरान को “annihilate” करने की चेतावनी दी।

इसके बाद ईरान की ओर से भी अमेरिका के खिलाफ कड़े बयान सामने आए हैं। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए बातचीत और संघर्ष के बीच अपनी शर्तें सामने रखी हैं।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट भी है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

ईरान ने पहले ही संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका को उसकी कुछ शर्तें माननी होंगी। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

होर्मुज के रास्ते से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां लंबे समय तक तनाव रहने पर सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि एशिया के कई देशों की ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।

अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत भी जारी

तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अभी भी कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन बातचीत जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तनाव बातचीत के जरिए कम होगा या फिर नए सैन्य हमलों से संघर्ष का दायरा और बढ़ेगा? ईरान की हिंद महासागर तक युद्ध फैलने की चेतावनी ने इस आशंका को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

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