ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, वीडियो में देखें होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘कब्रगाह’ बनाने की धमकी
ईरान के वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसिन रजाई ने अमेरिका को लेकर तीखी बयानबाज़ी की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिकी सेना के लिए “कब्रगाह” साबित हो सकता है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
मोहसिन रजाई, जो पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, ने अमेरिका की सैन्य मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए उसे “समुद्री लुटेरा” तक करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया का एकमात्र ऐसा “पाइरेट” है, जिसके पास अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं और जो समुद्री इलाकों में अपनी ताकत का प्रदर्शन करता है।
रजाई ने अपने बयान में पिछले महीने इस्फहान में हुई एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराए जाने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि जिस तरह उस विमान का मलबा जमीन पर बिखरा पड़ा था, वैसा ही अंजाम भविष्य में अमेरिकी जहाजों और सैनिकों का भी हो सकता है, यदि वे क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच इस तरह के बयान हालात को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।
रजाई के इस बयान को ईरान की ओर से एक रणनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह संदेश न केवल अमेरिका के लिए है, बल्कि उन देशों के लिए भी है जो इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का समर्थन करते हैं। ईरान पहले भी कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि वह अपनी समुद्री सीमाओं और रणनीतिक क्षेत्रों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस तरह की बयानबाज़ी पर चिंता जताई है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के आक्रामक बयान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशना चाहिए, ताकि किसी भी संभावित संघर्ष से बचा जा सके।
फिलहाल, इस बयान के बाद अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

