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Iran President Flight: पुतिन-जिनपिंग से अलग क्यों है पेजेश्कियन की भारत यात्रा? ईरानी विमान के रूट पर क्यों रहती है नजर
 

Iran President Flight: पुतिन-जिनपिंग से अलग क्यों है पेजेश्कियन की भारत यात्रा? ईरानी विमान के रूट पर क्यों रहती है नजर

भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए दुनियाभर के बड़े नेताओं का नई दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की भी उम्मीद है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की भारत यात्रा भी खास चर्चा में है।
इस यात्रा को लेकर सबसे ज्यादा दिलचस्पी उनके विमान के संभावित हवाई मार्ग को लेकर है। ईरान से भारत आने वाली उड़ान को पश्चिम एशिया के संवेदनशील इलाके और कई देशों के एयरस्पेस से होकर गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि उनकी यात्रा को सिर्फ एक राजनयिक दौरे के तौर पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।


लेकिन सवाल यह है कि ईरानी राष्ट्रपति की उड़ान को लेकर इतनी सावधानी क्यों बरती जाती है और यह स्थिति रूस या चीन के राष्ट्राध्यक्षों की यात्राओं से किस तरह अलग है?
Middle East Tension: सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया का माहौल
ईरानी राष्ट्रपति की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति है। इस क्षेत्र में लंबे समय से ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में हवाई मार्गों की सुरक्षा, एयरस्पेस की स्थिति और संभावित जोखिमों पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
किसी वीआईपी विमान की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सिर्फ तय रूट ही महत्वपूर्ण नहीं होता। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और संबंधित देशों के बीच समन्वय भी अहम भूमिका निभाते हैं।
इसी वजह से ईरान से निकलने वाली हाई-प्रोफाइल उड़ानों के मामले में सुरक्षा आकलन अपेक्षाकृत ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।


Western Sanctions: प्रतिबंधों का भी पड़ता है असर
ईरान का एविएशन सेक्टर लंबे समय से पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों का असर विमान के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और कुछ आधुनिक विमानन तकनीकों की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ईरान का हर विमान असुरक्षित है। किसी राष्ट्रपति की आधिकारिक उड़ान के लिए विमान की तकनीकी स्थिति, उड़ान अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था अलग स्तर पर सुनिश्चित की जाती है।
फिर भी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय विमानन व्यवस्था की जटिलताओं के कारण ईरानी विमानों से जुड़ी उड़ानों पर अतिरिक्त नियामकीय और तकनीकी ध्यान दिया जा सकता है।


India Security: भारतीय एयरस्पेस में सुरक्षा व्यवस्था
जब किसी देश का राष्ट्राध्यक्ष भारत आता है तो उसके विमान की सुरक्षा केवल एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहती। एयर ट्रैफिक कंट्रोल, सुरक्षा एजेंसियां और जरूरत के अनुसार अन्य संबंधित संस्थाएं आपस में समन्वय करती हैं।
BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि एक ही समय में कई देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचते हैं।
भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के बाद संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान की निगरानी और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की जाती है।


Intelligence Tracking: सरकारी विमानों पर क्यों रहती है नजर?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी संवेदनशील देश की सरकारी उड़ानें खुफिया और रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जा सकती हैं। ईरान के मामले में पश्चिम एशिया का तनाव इस निगरानी को और संवेदनशील बना देता है।
वहीं रूस और चीन भी बड़ी सैन्य और आर्थिक ताकतें हैं और उनके राष्ट्राध्यक्षों की यात्राएं भी उच्चस्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होती हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि केवल ईरानी विमान पर ही निगरानी रहती है।
फर्क मुख्य रूप से भू-राजनीतिक परिस्थितियों, संबंधित क्षेत्र के सुरक्षा जोखिम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की प्रकृति में है।


Iran vs Russia-China: असल अंतर क्या है?
रूस और चीन दोनों के पास अपने राष्ट्राध्यक्षों की विदेश यात्राओं के लिए मजबूत सरकारी विमानन और सुरक्षा ढांचा है। ईरान के मामले में क्षेत्रीय तनाव और प्रतिबंधों की वजह से परिस्थितियां अलग हैं।
यही कारण है कि पेजेश्कियन की भारत यात्रा को लेकर उनके विमान के रूट और सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी उड़ान सामान्य विमानन मानकों से बाहर है।


BRICS Summit में ईरान की मौजूदगी क्यों अहम?
ईरान की BRICS में भागीदारी उसके लिए भारत के साथ संबंधों और व्यापक वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, किसी बड़े बहुपक्षीय मंच पर ईरानी राष्ट्रपति की मौजूदगी का रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
कुल मिलाकर, ईरानी राष्ट्रपति के विमान की यात्रा को लेकर चर्चा का मुख्य कारण किसी एक तकनीकी कमजोरी से ज्यादा मध्य-पूर्व की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता है। भारत में उनके आगमन के दौरान सुरक्षा एजेंसियों का पूरा फोकस सुरक्षित और सुचारु यात्रा सुनिश्चित करने पर रहेगा।

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