ईरान ने मांगा अमेरिका से हर्जाना तो ट्रंप ने भी ठोका मुआवजे का दावा, बोले- मारे गए लोगों का देना होगा पैसा
अब तक, सिर्फ़ ईरान ही अमेरिका के साथ टकराव के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग करता रहा है। लेकिन सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को दशकों से चले आ रहे हमलों और टकरावों में हुई मौतों और घायलों के लिए मुआवज़ा देना चाहिए। यह मांग तब आई जब तेहरान ने खुद दुश्मनी खत्म करने के किसी भी समझौते के तहत वॉशिंगटन से मुआवज़े की मांग की थी।
सोमवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, "यह एक दिलचस्प विचार है क्योंकि अब मैं भी ईरान से मुआवज़े की मांग कर रहा हूं।" उन्होंने तेहरान पर सड़क किनारे बमों और अन्य टकरावों के ज़रिए लोगों को मारने और गंभीर रूप से घायल करने का आरोप लगाया।
**ट्रंप ने मुआवज़े की मांग की**
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ भविष्य की किसी भी बातचीत में ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों में मारे गए या घायल हुए लोगों के लिए मुआवज़ा शामिल होना चाहिए।
उन्होंने खास तौर पर साल 2000 में USS कोल पर हुए बम धमाके का ज़िक्र किया, जिसमें 17 अमेरिकी नाविक मारे गए थे, साथ ही युद्ध में मारे गए "हज़ारों अन्य लोगों" का भी ज़िक्र किया।
उन्होंने लिखा, "जनरल सुलेमानी की अगुवाई में सड़क किनारे बम धमाकों और अलग-अलग टकरावों के ज़रिए जिन लोगों को उसने मारा या गंभीर रूप से घायल किया — ऐसी हरकतें जिनके लिए वह कुख्यात है। इसमें USS कोल पर मारे गए लोगों के परिवार और युद्ध में मारे गए हज़ारों अन्य लोग शामिल हैं।"
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले 50 सालों में ईरान द्वारा मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए भी मुआवज़े की मांग की।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में पिछले पांच महीनों में हुई 52,000 मौतों का भी ज़िक्र किया, हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे मुआवज़े को "भविष्य की किसी भी बातचीत" का हिस्सा बनाएं।
**ईरान की मांगें क्या हैं?**
यह मांग तब आई जब ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए कई शर्तें रखीं — इन शर्तों में युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा और इस अहम जलमार्ग पर समझौते तक पहुँचने की जटिल कोशिशें शामिल हैं। शनिवार को ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहम्मद बाघेर ज़ोलकादर ने मांगों की एक सूची पेश की, जिसमें लेबनान, फ़िलिस्तीन, यमन और इराक में ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ़ युद्ध और आक्रामकता को खत्म करना शामिल था।
उन्होंने कहा कि ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाई जानी चाहिए, प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए, ज़ब्त की गई संपत्ति वापस की जानी चाहिए और युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा दिया जाना चाहिए।
रविवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि वैकल्पिक शिपिंग रूट (जहाज़ों के रास्ते) पर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका ईरान की मांगों को कब मानता है। सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अमेरिका के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की शिकायत करने का कोई "नैतिक या कानूनी आधार" नहीं है।
**अब तक युद्ध में ईरान को हुए नुकसान का दायरा**
अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमलों से इस शिया देश को भारी नुकसान हुआ है। बुनियादी ढांचे और सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचने के अलावा, इसकी अर्थव्यवस्था पर भी गहरी चोट पड़ी है। खबरों के मुताबिक, संघर्ष के शुरुआती हफ्तों में ही ईरान को लगभग 145 अरब डॉलर का आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ा, जिसमें कई अहम मिसाइल उत्पादन केंद्र और लॉन्च साइटें नष्ट हो गईं।
**अमेरिका को कितना नुकसान हुआ?**
पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में अब तक लगभग ₹3.15 लाख करोड़ खर्च किए हैं। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर मिसाइल बदलने और उपकरणों के नुकसान की लागत को भी इसमें शामिल किया जाए, तो कुल खर्च कई गुना अधिक हो सकता है।

