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चीन की मर्जी पर निर्भर हो सकती हैं भारत की सुरंगें! वीडियो में जाने टनल बनाने वाली विशाल मशीनों के निर्यात पर लगा सकता है रोक, हिमालय में सड़क और सेना की पहुंच पर पड़ सकता है असर

चीन की मर्जी पर निर्भर हो सकती हैं भारत की सुरंगें! वीडियो में जाने टनल बनाने वाली विशाल मशीनों के निर्यात पर लगा सकता है रोक, हिमालय में सड़क और सेना की पहुंच पर पड़ सकता है असर

दुनिया में कुछ ऐसी विशाल मशीनें हैं, जिनकी लंबाई फुटबॉल मैदान के बराबर होती है। इनका इस्तेमाल पहाड़ों के अंदर सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। स्टील से बनी इन मशीनों के अगले हिस्से में बड़े-बड़े काटने वाले ब्लेड लगे होते हैं, जो कठोर चट्टानों को काटकर रास्ता बनाते हैं। इन्हें टनल बोरिंग मशीन (TBM) कहा जाता है। भारत भी हिमालय के दुर्गम इलाकों में सड़क और रेल सुरंग बनाने के लिए इन मशीनों का इस्तेमाल करता है। लेकिन आने वाले समय में भारत के लिए इन मशीनों की खरीद मुश्किल हो सकती है। इसकी वजह चीन की नई निर्यात नीतियां हैं।दरअसल, दुनिया में बहुत कम कंपनियां टनल बोरिंग मशीनों का निर्माण करती हैं। इनमें से कई प्रमुख कंपनियों की फैक्ट्रियां चीन में स्थित हैं। ऐसे में चीन अगर इन मशीनों के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ाता है या भारत को बिक्री की अनुमति नहीं देता है, तो भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।

क्या होती है टनल बोरिंग मशीन?

टनल बोरिंग मशीन यानी TBM एक अत्याधुनिक इंजीनियरिंग मशीन है, जिसका इस्तेमा पहाड़ों और जमीन के नीचे लंबी सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। इसका अगला हिस्सा बड़े गोलाकार कटिंग हेड से बना होता है। इसमें लगे मजबूत ब्लेड चट्टानों और मिट्टी को काटते हुए आगे बढ़ते हैं।मशीन के पीछे लगे उपकरण खुदाई से निकले मलबे को बाहर पहुंचाते हैं। इसके साथ ही सुरंग की दीवारों को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के हिस्से भी लगाए जाते हैं। इससे सुरंग बनाने का काम व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।इन मशीनों का इस्तेमाल सड़क, रेलवे, मेट्रो और जल आपूर्ति से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में किया जाता है।

हिमालय में भारत के लिए क्यों अहम हैं ये मशीनें?

भारत के लिए टनल बोरिंग मशीनों का महत्व हिमालयी क्षेत्र में काफी ज्यादा है। पहाड़ी इलाकों में सड़क और रेल नेटवर्क विकसित करना आसान नहीं होता। यहां कठोर चट्टानें, भूस्खलन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां निर्माण कार्य को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।भारत इन मशीनों की मदद से हिमालय में सुरंगों का निर्माण कर रहा है। इससे दुर्गम इलाकों तक सड़क संपर्क बेहतर करने में मदद मिलती है। खासकर चीन से लगी सीमा के आसपास बुनियादी ढांचे का विकास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।सीमावर्ती इलाकों में बेहतर सड़क और सुरंग नेटवर्क होने से सेना के जवानों, सैन्य वाहनों और जरूरी सामान को तेजी से पहुंचाया जा सकता है। इससे सीमा पर सैन्य तैयारियों और लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलती है।

चीन क्यों बढ़ा रहा है निर्यात पर नियंत्रण?

चीन अपनी फैक्ट्रियों और प्रयोगशालाओं में विकसित होने वाली तकनीकों और उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ा रहा है। पिछले एक महीने में उसने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात प्रतिबंध लगाने या नियंत्रण बढ़ाने के कदम उठाए हैं।इनमें ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल और एजेंट, नई दवाएं बनाने की तकनीक और सोलर पैनल निर्माण से जुड़ी कुछ प्रक्रियाएं शामिल हैं।इस नीति के तहत चीन यह तय करने की क्षमता बढ़ा रहा है कि उसकी तकनीक और उत्पाद किन देशों को बेचे जाएंगे। ऐसे में टनल बोरिंग मशीनों के निर्यात को लेकर भी भारत की चिंता बढ़ सकती है।

भारत के सामने क्या होगी चुनौती?

अगर चीन टनल बोरिंग मशीनों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है या निर्यात प्रक्रिया को कठिन बनाता है, तो भारत को दूसरे देशों की कंपनियों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है। इससे मशीनों की खरीद महंगी होने और परियोजनाओं में देरी की आशंका पैदा हो सकती है।हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन टनल बोरिंग मशीनों को लेकर क्या नीति अपनाता है और भारत के पास वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं के कितने विकल्प उपलब्ध हैं।भारत के लिए ऐसी मशीनों का घरेलू निर्माण और तकनीकी क्षमता विकसित करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे भविष्य में रणनीतिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम की जा सकेगी।

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