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पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब! धमकियों के बीच दिल्ली ने कहा- फैसला नहीं बदलेगा, सस्पेंशन जारी रहे

पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब! धमकियों के बीच दिल्ली ने कहा- फैसला नहीं बदलेगा, सस्पेंशन जारी रहे

भारत ने एक बार फिर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान की पानी की सप्लाई लाइन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' की है। इस्लामाबाद की धमकियों और बड़बोलेपन को खारिज करते हुए, भारत सरकार ने फिर से कहा है कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।" सरकार ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि फिलहाल सस्पेंड रहेगी। भारत के इस कड़े फैसले से पाकिस्तानी नेतृत्व में खलबली मच गई है।

भारत ने पाकिस्तान के साथ दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पूरी तरह साफ और एक जैसा रहा है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण इस संधि को सस्पेंड किया गया है।

जायसवाल ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान को भरोसेमंद और स्थायी तौर पर सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का यह फैसला सीधे तौर पर इस्लामाबाद द्वारा आतंकी गतिविधियों को दिए जा रहे समर्थन से जुड़ा है। 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ रणनीतिक और कूटनीतिक कदम उठाए, जिसमें संधि को सस्पेंड करना भी शामिल है।


पाकिस्तान को झटका
सिंधु जल संधि पर सस्पेंशन न हटाने के फैसले को पाकिस्तान ने खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने भारत पर पानी का इस्तेमाल रणनीतिक हथियार के तौर पर करने का आरोप लगाया। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भारत के तर्क को खारिज करते हुए दावा किया कि आतंकवाद के आरोप सिर्फ एक बहाना हैं ताकि संधि के तहत पाकिस्तान को पानी का उसका जायज हक न दिया जाए।

**पाकिस्तानी मंत्रियों की 'युद्ध' की धमकी**

भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी नेता संधि को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं। पाकिस्तानी नेताओं ने भारत के फैसले की कड़ी आलोचना की है और चेतावनी दी है कि अगर मामला सुलझाया नहीं गया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि इस्लामाबाद संधि के तहत पाकिस्तान के पानी के हिस्से को छीनने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के "हाथ काट देगा"। उन्होंने आगे कहा कि देश के पानी के कोटे को कम करने की किसी भी कोशिश को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी चेतावनी दी कि अगर विवाद शांतिपूर्ण ढंग से नहीं सुलझाया गया, तो इसका नतीजा "जल युद्ध" के रूप में हो सकता है। उन्होंने भारत पर पानी को विवाद का मुद्दा बनाने का आरोप लगाया और कहा कि संधि को लगातार निलंबित रखने से परमाणु हथियार वाले इन दो पड़ोसियों के बीच रिश्ते और खराब हो सकते हैं।

**संधि पर पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री का रुख**

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री, इशाक डार ने भारत के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि कोई भी पक्ष एकतरफा तरीके से संधि की शर्तों को निलंबित या खत्म नहीं कर सकता, क्योंकि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान को उसके हिस्से का पानी न देने से क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।

**तीस्ता नदी परियोजना पर रुख**

इस बीच, भारत सरकार ने कहा है कि बांग्लादेश में विभिन्न परियोजनाओं के लिए उसकी विकास सहायता आपसी सहमति से बने रोडमैप पर आधारित है, जिसकी नियमित रूप से समीक्षा की जाती है। तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्वास परियोजना पर चल रही बातचीत का जिक्र करते हुए, रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस मामले पर बांग्लादेश के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में परियोजनाओं के लिए भारत की विकास सहायता आपसी सहमति से बने रोडमैप पर आधारित है, जिसकी नियमित रूप से समीक्षा की जाती है। तीस्ता नदी परियोजना पर हमारे विचार पहले ही बांग्लादेशी पक्ष को बता दिए गए हैं। तीस्ता मुद्दे पर अपने समग्र दृष्टिकोण में हम सभी संबंधित घटनाक्रमों को ध्यान में रखेंगे।

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