अमरीका की तरक्की में 71% रोल भारतीयों का! जानिए जेडी वेंस के बयान पर भारत ने क्यों जताई कड़ी आपत्ति
अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताया है। उनके इस बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत का कहना है कि प्रवासी पेशेवर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ नई तकनीक, रिसर्च और रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।भारत ने यह भी कहा कि भारतीय पेशेवरों के योगदान से भारत और अमेरिका, दोनों देशों को फायदा होता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में H-1B वीजा हासिल करने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 71 फीसदी बताई जाती है।
JD वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने खास तौर पर माइक्रोसॉफ्ट का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देने पर ध्यान देना चाहिए।वेंस के मुताबिक, पिछले एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि इसी अवधि में कंपनी को 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ मिला। उन्होंने इस व्यवस्था की आलोचना करते हुए इसे खत्म करने की मांग की।हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों को समझने के लिए संबंधित कंपनी के रोजगार और वीजा संबंधी आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
भारत ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान का किया जिक्र
वेंस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि प्रवासी पेशेवर अमेरिका की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारतीय इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और दूसरे कुशल कर्मचारी तकनीकी विकास, अनुसंधान और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
भारत का पक्ष है कि भारतीय पेशेवरों की भूमिका को केवल नौकरियों की प्रतिस्पर्धा के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके कौशल और अनुभव से अमेरिकी कंपनियों को भी लाभ मिलता है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।
H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड में क्या अंतर है?
H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड, दोनों की व्यवस्था अलग-अलग है।
-
H-1B वीजा: इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ विशेष व्यवसायों में योग्य विदेशी पेशेवरों को अस्थायी रूप से नौकरी पर रख सकती हैं। यह वीजा निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन होता है।
-
ग्रीन कार्ड: यह अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने के कुछ मामलों में PERM प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है।
PERM प्रक्रिया के तहत नियोक्ता को आम तौर पर यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं था और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से समान परिस्थितियों में अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कामकाजी स्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ग्रीन कार्ड की सभी श्रेणियों में PERM प्रक्रिया अनिवार्य नहीं होती।
8 बड़ी IT कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम पर रोक का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने आठ बड़ी आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM प्रक्रिया पर रोक लगाई है। इस सूची में इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी के नाम शामिल बताए गए हैं।इस कार्रवाई के पीछे विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसरों को लेकर चिंताओं का जिक्र किया गया है। हालांकि, इस तरह की रोक का सटीक दायरा, संबंधित कंपनियों की स्थिति और सरकारी आदेश की शर्तों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से करना जरूरी है।
क्या PERM पर रोक लगने से H-1B वीजा भी रद्द हो जाएगा?
नहीं, PERM प्रक्रिया पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि पहले से जारी H-1B वीजा अपने आप रद्द हो जाएंगे। H-1B वीजा और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रियाएं अलग हैं।हालांकि, जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया PERM पर निर्भर है, उन्हें आवेदन में देरी या दूसरी प्रशासनिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसका वास्तविक असर संबंधित सरकारी आदेश और प्रत्येक कर्मचारी के मामले पर निर्भर करेगा।
भारतीय पेशेवरों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर आईटी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव का असर भारतीय कर्मचारियों, अमेरिकी कंपनियों और दोनों देशों के तकनीकी सहयोग पर पड़ सकता है।अब इस मुद्दे पर आगे की स्थिति अमेरिकी सरकार की नीतियों, आधिकारिक फैसलों और भारत-अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।

