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भारत-जापान की बड़ी तैयारी! व्यापार में घटेगी डॉलर की भूमिका, वीडियो में जाने रुपए-येन में लेनदेन पर हो सकता है ऐलान

भारत-जापान की बड़ी तैयारी! व्यापार में घटेगी डॉलर की भूमिका, वीडियो में जाने रुपए-येन में लेनदेन पर हो सकता है ऐलान

भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की योजना पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच व्यापारिक भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में किया जा सकेगा।निक्की एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई भुगतान व्यवस्था की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच नई दिल्ली में होने वाली द्विपक्षीय बैठक के बाद की जा सकती है। यदि यह योजना लागू होती है, तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

तीन दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं जापान की प्रधानमंत्री

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची आज से तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा होगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।

इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

शिखर सम्मेलन में भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के अलावा रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमोबाइल उद्योग, वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत होगी। दोनों देश उभरती तकनीकों और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर भी जोर देंगे।

डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और जापान स्थानीय मुद्राओं में व्यापार शुरू करते हैं, तो इससे विदेशी मुद्रा विनिमय लागत कम होगी, कारोबार आसान बनेगा और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरताभी घटेगी। हाल के वर्षों में कई देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं और भारत भी इस दिशा में कई देशों के साथ पहल कर चुका है। भारत और जापान के बीच प्रस्तावित यह नई व्यवस्था दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ एशिया में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को भी मजबूत कर सकती है।

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