India-Russia Defense Alert: ईरान तनाव के बीच भारत को मिलेगा तुंगुस्का डिफेंस सिस्टम, जानें पावर और कितना खतरनाक
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच, भारत ने रूस से 'तुंगुस्का' एंटी-एयरक्राफ्ट और मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना की घोषणा की है। इसी मकसद से, भारत ने रूस की रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ ₹445 करोड़ की डील पक्की कर ली है। यह तुंगुस्का सिस्टम भारतीय सेना (थल सेना) के लिए खरीदा जा रहा है, ताकि युद्ध के मैदान में टैंकों और मशीनीकृत वाहनों को हवाई सुरक्षा दी जा सके। रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने और P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों के डिपो-स्तर के रखरखाव के लिए कुल ₹858 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत की बहु-स्तरीय हवाई रक्षा क्षमताओं में होगा इज़ाफ़ा
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 27 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रूस की JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। ये अत्याधुनिक मिसाइलें विमानों, ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों सहित हवाई खतरों के खिलाफ भारत की बहु-स्तरीय हवाई रक्षा क्षमताओं को और मज़बूत करेंगी। यह समझौता भारत और रूस के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और भी सुदृढ़ करेगा।
रूसी 'तुंगुस्का' की ताक़त
तुंगुस्का एंटी-एयरक्राफ्ट और मिसाइल सिस्टम देखने में एक टैंक जैसा लगता है और यह दुश्मन के विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोनों और यहाँ तक कि क्रूज मिसाइलों को भी मार गिराने में सक्षम है। रूसी सेना ने यूक्रेन के खिलाफ अपने अभियानों में इस सिस्टम को तैनात किया है। खास बात यह है कि यह सिस्टम अपने आप में अनोखा है, क्योंकि यह बंदूकों और मिसाइलों, दोनों से लैस है।
P-8I विमानों के लिए ₹413 करोड़ की डील
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना द्वारा संचालित P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों के डिपो-स्तर के रखरखाव के लिए बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ ₹413 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे P-8I बेड़े का रखरखाव और मरम्मत देश के भीतर ही किया जा सकेगा। 2018 में, भारत ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कुल पाँच स्क्वाड्रन खरीदने के लिए रूस के साथ एक डील पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें से, भारत को तीन स्क्वाड्रन पहले ही मिल चुकी हैं, जबकि बाकी दो की डिलीवरी अभी बाकी है। रूस ने हाल ही में कहा था कि वह इस साल के अंत तक बाकी स्क्वाड्रन भारत को सौंप देगा।

