भारत और जर्मनी के बीच हो रही अबतक की सबसे बड़ी डिफेंस डील, 8 अरब डॉलर की बड़ी रकम में क्या कुछ शामिल
भारत अब तक की अपनी सबसे बड़ी डिफेंस डील के लिए जर्मनी के साथ काम कर रहा है। दोनों देश अत्याधुनिक सबमरीन बनाने की बारीकियों पर चर्चा कर रहे हैं, यह डील कम से कम $8 बिलियन की होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा डिफेंस समझौता होगा। भारत अभी फ्रांस से सबमरीन खरीद रहा है, इसलिए जर्मनी के साथ यह संभावित डील एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है।
सबमरीन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और जर्मनी सबमरीन बनाने के लिए $8 बिलियन की डिफेंस डील पर काम कर रहे हैं। अगले हफ्ते जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा से पहले समझौते को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस डील के तहत पहली बार भारत को सबमरीन बनाने की टेक्नोलॉजी भी मिलेगी।
जर्मन-मॉडल की सबमरीन भारत में बनेंगी
भारतीय नौसेना के पास लगभग एक दर्जन रूसी-निर्मित सबमरीन हैं और उसने फ्रांस में बनी छह नई सबमरीन खरीदी हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर जर्मनी के साथ डील फाइनल हो जाती है, तो फ्रांस से तीन और सबमरीन खरीदने की भारत की योजना रद्द हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, ये सबमरीन जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स GmbH और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मिलकर बनाएंगी।
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ भारत आ रहे हैं
जर्मन चांसलर मर्ज़ पहली बार भारत आ रहे हैं। सोमवार (12 जनवरी, 2026) को वह सीधे गुजरात के अहमदाबाद पहुंचेंगे, जहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। इसके बाद वह बेंगलुरु जाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देश फार्मास्युटिकल सेक्टर के साथ-साथ डिफेंस सेक्टर में भी आपसी सहयोग बढ़ाएंगे। इसके अलावा, मर्ज़ पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान यूरोपीय संघ और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चल रही बातचीत को तेज करने की कोशिश करेंगे।
सबमरीन ज़्यादा समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी
जर्मन टेक्नोलॉजी से लैस नई सबमरीन में एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा। यह सिस्टम सबमरीन की क्षमताओं को बढ़ाता है, जिससे वे डीजल-इलेक्ट्रिक सिस्टम वाली सबमरीन की तुलना में ज़्यादा समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने भी अभी तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

