IMD का बड़ा अनुमान: 2026 में देश में सामान्य से कम बारिश के आसार, वीडियो में जाने मानसून रहेगा कमजोर
भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) ने सोमवार को जारी अपने ताज़ा पूर्वानुमान में कहा है कि इस वर्ष देश में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। विभाग के अनुसार, 2026 के मानसून सीजन में औसत से कम वर्षा होने की संभावना है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
IMD के अनुमान के मुताबिक, इस साल देशभर में लगभग 80 सेंटीमीटर बारिश होने की संभावना है, जबकि 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर भारत में सामान्य औसत वर्षा लगभग 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। इस तरह कुल मिलाकर वर्षा सामान्य से कम रहने का संकेत मिल रहा है।
मौसम विभाग ने यह भी बताया कि पिछले आठ वर्षों में यह पहली बार है जब मानसून के सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। इससे पहले लगातार कई वर्षों तक मानसून सामान्य या उससे बेहतर रहा था।
हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि देश के कुछ क्षेत्रों में स्थिति अलग हो सकती है। लद्दाख, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के मध्य हिस्सों, दक्षिण ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य के आसपास या बेहतर बारिश की संभावना बनी रह सकती है। लेकिन देश के ज्यादातर हिस्सों में औसत से कम वर्षा होने की आशंका जताई गई है।
Dr. M. Mohapatra ने जानकारी देते हुए कहा कि इस वर्ष देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम है और 2018 के बाद सबसे कमजोर मानसून संकेत देता है, जब देश में केवल 91 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मानसून कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, खासकर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। साथ ही, जलाशयों के स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
IMD का यह पूर्वानुमान सरकार और राज्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके आधार पर जल प्रबंधन और कृषि रणनीतियों की योजना तैयार की जाएगी। फिलहाल सभी की नजर आगामी महीनों में मानसून की वास्तविक प्रगति पर टिकी हुई है।

