हमारी बात नहीं मानी तो मादुरो से भी बुरा हाल करेंगे... ट्रम्प की वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, Video
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं, तो उनका हाल राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से भी बुरा किया जाएगा। ट्रम्प के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और लैटिन अमेरिकी देशों में चिंता बढ़ा दी है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा कि वेनेजुएला लंबे समय से अमेरिका की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए चुनौती बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सत्ता अमेरिका विरोधी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही है। ट्रम्प ने कहा, “हमने मादुरो को सबक सिखाया था और अगर नई अंतरिम सरकार भी हमारी बात नहीं मानेगी, तो हम उससे भी कड़ा रुख अपनाएंगे।”
ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब वेनेजुएला राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबावों से जूझ रहा है। देश में वर्षों से सत्ता संघर्ष जारी है। एक ओर मादुरो सरकार है, तो दूसरी ओर विपक्ष समर्थित अंतरिम नेतृत्व, जिसे कुछ पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि हाल के महीनों में अंतरिम सरकार की स्थिति कमजोर होती दिखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। अमेरिका में चुनावी माहौल के बीच ट्रम्प एक बार फिर “कठोर विदेश नीति” की अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वेनेजुएला को लेकर सख्त बयान देकर वे अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह सत्ता में लौटे तो अमेरिका विरोधी सरकारों के खिलाफ कठोर कदम उठाएंगे।
ट्रम्प प्रशासन के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था और ज्यादा चरमरा गई थी। तेल निर्यात पर पाबंदियों के चलते देश में महंगाई, बेरोजगारी और खाद्य संकट गहराता चला गया। आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी दबावों का सीधा असर आम वेनेजुएला नागरिकों पर पड़ा।
वहीं, ट्रम्प के ताजा बयान पर वेनेजुएला सरकार और विपक्ष दोनों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की धमकियां वेनेजुएला में राजनीतिक समाधान की संभावनाओं को और कमजोर कर सकती हैं। लैटिन अमेरिकी देशों ने भी अतीत में अमेरिका के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं।

